कोरोनावायरस (COVID19): क्या चीन ने पूरी दुनिया को बनाया अप्रैल फूल ?

Anoop kumar Pandey​


कोरोनावारस (COVID 19) की वजह से पूरी दुनिया ‘घर में रहो ना’ की स्थिति में है. वहीं, इस महामारी के जनक देश चीन (China) में अब लॉकडाउन (Lockdown) खत्म करने की बात हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन सरकार कोरोनावायरस (COVID 19) की शुरुआती जगह वुहान (Wuhan) में, फैक्ट्रियों को जल्द ही खोलने की तैयारी में है. इस महामारी (Epidemic) की वजह से आज लगभग पूरी दुनिया ठप सी हो गई है. वहीं, चीन अपनी आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की स्थिति में है. ऐसे में दुनिया के लोगों के दिलों में एक सवाल खड़ा हो रहा है कि हम सच में बीमार हुए हैं या हमें बीमार किया गया है? अप्रैल के पहले हफ्ते से वुहान में लॉकडाउन समाप्त करने और फैक्ट्रियों को दोबारा खोलने की योजना किस तरफ इशारा करती है. कहीं चीन ने अपने आर्थिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए पूरी दुनिया को अप्रैल फूल तो नहीं बनाया?

27 मार्च 2020 को वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video conferencing) के जरिए जी-20 (G-20) देशों की मीटिंग हुई. इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी ज़िनपिंग ने प्रस्ताव रखा कि आयात-निर्यात पर लगने वाले सभी टैरिफ हटा दिए जाएं. चीन को छोड़कर ज्यादातर देश आर्थिक गतिविधियों को चालु रख पाने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसी परिस्थिति में व्यपार से किसका लाभ होगा, ये सहज ही समझा जा सकता है.

सच क्यों छिपाता रहा चीन-
आधिकारिक तौर पर चीन ने 31 दिसंबर 2019 को इस बीमारी के बारे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बताया. चीन ने कहा था कि कोरोना वायरस का संक्रमण एक इंसान से दूसरे इंसान नें नहीं हो रहा है. साथ ही स्थिति पूरी तहर कंट्रोल में है, जबकि सच ठीक इसके उलट था. 
चीन के आंतरिक और ‘द गार्डियन’ के रिपोर्ट्स के मुताबिक 17 नवबंर 2019 को चीन में कोरोना का पहला मामला समाने आ चुका था. यानी कि चीन इस वायरस को करीब डेढ़ महीने तक दुनिया और WHO से छिपाता रहा. 
इसके पहले डॉक्टर ली वेनलियांग, चीन के सोशल मीडिया पर इस वायरस के बारे में बता चुके थे, जिसकी वजह से वहां के सरकार ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था और बाद में कोरोना की चपेट में आने से उनकी मौत भी हो गई. ‘द गार्डियन’ के रिपोर्ट के मुताबिक चीन द्वारा WHO को इस वायरस के बार में बताने तक वहां 60 से अधिक मामले आ चुके थे.

नहीं कह सकते ‘चीनी वायरस’-
सामान्य तौर पर कोई वायरस जहां से उत्पन्न होता है, उस स्थान के नाम के साथ उस वायरल का नाम जोड़ दिया जाता था. जैसे स्पेने से फैलने वाले फ्लू का नाम ‘स्पेनिश फ्लू’, मीडिल ईस्ट से फैले कोराना को ‘मिडिल ईस्ट कोरना’, जापान से फैले जापानी इंसेफलाइटिस. लेकिन, कोरोना वायरस के मामले में ऐसा नहीं है. इसके ‘चीनी वायरस’ कहे जाने पर चीन ने आपत्ति जताई है और इसके आधिकारिक नाम nCOVID19 (Novel Coronavirus disease 2019)  को ही प्रचलन में लाने की बात कही है. इसे लेकर चीन भारत समेत दुनिया के कई देशो को पत्र भी लिख चुका है. 
संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के सदस्य देशों की संख्या से ज्यादा देशों में लॉकडाउन-
विश्व के सबसे बड़े संगठन संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 देश सदस्य हैं, लेकिन कोरानावायरस का कहर उससे कहीं अधिक देशों तक पहुंच चुका है. एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनावायरस की वजह से  भारत समेत दुनिया के 199 देशों में लॉकडाउन की स्थिति है. देश के पीएम ने कोरोनावायरस से निपटने के लिए 21 दिनों का संपूर्ण लॉकडाउन घोषित किया है.