चम्बल के पिनाहट घाट की, लंबी हुई कहानी, पुल बनने में और हो रही देरी

राजीव गांधी की रखी आधार शिला को भूली कांग्रेस, अपने ही नेता  के सपने  को पूरा नहीं होते देखना चाहती  


आगरा
 / पिनाहट । कांग्रेस सरकार ने पिनाहत  घाट पर शिवराज सरकार द्वारा पारित व निर्माणाधीन पुल के ठेका को ही पिलर की संख्या के विवाद के चलते जनवरी में रद्द करके ये सन्देश दिया । 
मगर क्रद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह की पहल और अम्बाह के विधायक के द्वारा बुलंद की आवाज पर पुराने ही बजट का संसोधित टेंडर जारी कर अवशेष धन राशि 68 करोड़ अवमुक्त की है । 
उधर मध्यप्रदेश शाशन ने 2017 में कम्प्लीट होने वाले इस पुल के लिए अवधेश भदौरिया की याचिका पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट को दो साल 2019 तक का जो पूर्ण कराने का समय दिया था निकल जाने पर भी फिर जवाब के लिए अवधेश भदौरिया सक्रिय हो चुके हैं । 
1989 में पिनाहट के जोधपुरा में जो पुल राजीव गांधी ने शिलान्याशीत किया था रेत के घरौंदे की तरह कांग्रेस दो बार शासन में आने केबाद ढाहाती रही ।तब नरेन्द्र सिंह संसद मुरैना से अम्बाह के विधायक व जनता ने कहा तो मध्यप्रदेश सरकार ने पुरानी स्थिति पर ही पक्का पुल स्वीकृत किया । जिसे अब कांग्रेस सरकार ही रुकवा के राजीव गांधी के किये कार्य के फर्जी नामे को उजागर कर रही है । 
राजीव गांधी तब प्रधामंत्री थे  । उन्हें राजनीतिक मीटिंग आगरा की गुट बाजी खत्म करने के लिए करानी थी । जिसके लिए पुल का बहाना कर दश्यु उन्मूलन के पांच करोड़ रुपये शिलान्यास के नाम पर खर्च करके चलते बने । मजे की बात उक्त पुल के प्रस्ताव तक की घोषणा सेक्शन में नहीं पाई गई और बाह की जनता 27 साल तक वेबकूफ बनती रही । वो भला हो फ़ेसबुक क्लब का जिसके सदस्यों ने छानबीन की तो ये घपला पता चला । जिसमें नरेश पारस, आनंद राय, सुदर्शन दुआ , शंकर देव तिवारी , डाक्टर देवाशीष भट्टाचार्य आदि थे ।

अब योजना 
68 करोड़ का बजट 
800 मीटर लम्बा होगा पुल
12 मीटर चोड़ा होगा पुल
15 खम्बे बनेंगे कुल 

जो काम हुआ 
सम्पर्क मार्ग 
10 खम्बों पर आधार के ऊपर तक कार्य प्रारंभ 
और अनुमानित ऊँचाई के आंकलन की बाड़ टांगी जिसे बाढ़ ने उड़ा दिया वैसे ही ठेकेदार भाग खड़ा हुआ ।