ससुर से बोला दामाद, पुलिस में सिपाही हूं कार तो चाहिए, उढेल दिया विवाहिता पर मिट्टी का तेल

-बेटे वालों की हर जायज, नाजायज मांग कर रहे पूरी
-लाखों के दहेज के बाद भी नहीं कर पा रहे बेटे वालों को संतुष्ट

 

 
मथुरा। दहेज लेना और देना दोनों ही बातें भले ही गलत हों लेकिन सरकारी नौकरी एक ऐसा जाल है जिसमें बेटियों के पिता फंस ही जाते हैं। बेटी के लिए सरकारी नौकरी वाले दमाद की चाहत पिताओं के अंदर इस कदर बढ गई है कि वह इस बीच लडके के तमाम गुणा अवगुणों और जायज नाजायज मांगों को भी देख कर अनदेखा कर देते हैं। शादी के बाद दहेज का दानव अपना मुंह और चैडा कर लेता है तो उन्हें अपनी गलती का अहसास होता है।
ऐसी की गलती पर गांव कारब निवासी सत्यप्रकाश अब पछता रहे हैं। उन्हेंने अपनी पुत्री सोहरत की शादी 7 जुलाई को इसी साल गांव सिरोहा थाना जमुनापार निवासी अमित पुत्र राजवीर के साथ की थी। 13 जून को अमित के पिता राजवीर के कहने पर 11 लाख रूपये आरटीजीएस कर अपने पुत्र और पत्नी के खते से राजवीर के खाते में ट्रांसफर किये थे। शादी के वक्त दस तोला सोना, चार लाख रूपये का फर्नीचर व दूसरा भरपूर सामान दिया था। शादी के बाद से ही दामाद अमित, बेटी की सास मंजू देवी, ससुर राजवीर, ननद कविता और रीना प्रताडित करने लगे। बेटी के ससुरालीजन इतने दहेज से संतुष्ट नहीं हैं और धन की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर आये दिन बेटी के साथ मारपीट की जाने लगी। बेटी के पिता सत्यप्रकाश ने दर्ज रिपोर्ट में लिखा है कि बेटी ने शादी के दो महीने बाद मुझे फोन पर बताया कि ससुरालीजन और दहेज की मांग कर रहे हैं। मेरे साथ गलत हरकतें की जा रही हैं। बेटी का पिता जब बेटी की ससुराल पहुंचा तो दामाद ने पुलिसवाला होने की बात कह कर कार की मांग कर दी और धमकी दी कि अगर मांग पूरी नहीं हुई तो आपकी बेटी यहां नहीं रह सकती। इसके कुछ दिन बाद मेरी बेटी को इन लोगों ने मारपीट कर घर से निकाल दिया। में अपनी बेटी को सिहोरा से अपने घर कारब ले आया। इसके बाद सामाज का सहारा लिया और बेटी को दोबार उसकी ससुराल छोड आया। बीस अक्टूबर को मेरी फिर विवाहिता ने अपने पिता को फोन कर बताया कि उसकी किसी भी दिन ससुरालीजन हत्या कर देंगे। जितना जल्दी हो मुझे यहां से निकाल लें। उसी दिन सत्यप्रकश अपनी बेटी को घर ले आये। इसके बाद जब उन्हें पता चला कि दामाद तीन दिसम्बर को छुट्टी आया है तो अपनी बेटी को दुबारा सत्यप्रकाश सिहोरा लेकर पहुंचा और दामद को समझा बुझाकर बेटी को उसकी ससुराल छोड आया। वह अपने गांव कारब आया ही था कि उसकी बेटी का फिर फोन आया कि आज ये मुझे मार देंगे। गांव के कुछ लोगों को साथ लेकर सत्यप्रकाश उल्टेपांव सिहोरा पहुंचा तो बेटी के कपडों से मिट्टी के तेल की बदबू आ रही थी। इस बीच उसे मारने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुए। सत्यप्रकाश का कहना है कि अगर वह समय से नहीं पहुंचते तो उसकी बेटी की हत्या हो चुकी होती। हम लोगों को आता देख वह घर से फरार हो गये।  
सत्यप्रकाश ने बताया कि बेटी की शादी से पहले भी लोगों ने इस परिवार के बारे में बताया था कि इन लोगों का चाल चलन अच्छा नहीं है। ये लोग रिश्ता बनाने लायक नहीं हैं, लेकिन लडके की पुलिस में नौकरी देख कर मैंने किसी की नहीं सुनी, शादी के दौरान उनकी जायज और नाजायज मांगों को पूरा करता रहा। सत्यप्रकाश बेटी की जिंदगी तबाह करने के लिए खुद को दोषी मान रहे हैं और दहेज लोभियांे के चंगुल में फंस जाने की ग्लानि से भरे हुए हैं।