फर्जीवाड़ा : 41 रिक्त पदों के सापेक्ष 108 लोगों को फर्जी तरह से नौकरी दी गई थी

विश्वविद्यालय की भूल भुलैया में अब गुम नहीं होगी शिक्षक फर्जीवाडे की ’हकीकत’
108 शिक्षकों की नौकरी से छुट्टी तय...

मथुरा। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त हो जाएंगे। यह विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में लिया गया। ऐसा हो जाने का सबसे पहला असर यह होगा कि मथुरा जिले में 108 शिक्षकों की नौकरी से छुट्टी हो जाएगी।
मथुरा में 257 के सापेक्ष 216 शिक्षकों की भर्ती हुई थी। शेष रिक्त बचे 41 पदों पर अदालत के आदेश पर नियुक्ति की गई थी। लेकिन इस भर्ती में फजीवाड़े का खुलासा उस समय हुआ जब विनोद चैधरी द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने इसकी जांच के लिए एसटीएफ एवं जिला स्तर पर एसआईटी का गठन किया। इस जांच में खुलासा हुआ कि 41 रिक्त पदों के सापेक्ष 108 लोगों को फर्जी तरह से नौकरी दे दी गई। इस मामले में वर्तमान बीएसएस चंद्रशेखर द्वारा प्रमुख सचिव डा. प्रभात कुमार के निर्देश पर विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के माध्यम से 108 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थीं। इस मामले में मास्टरमाइंड समेत 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


परिषदीय विद्यालयों के इन शिक्षकों की बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई थी लेकिन तिकड़म करके बचे हुए हैं। बीएसए ने इन शिक्षकों से इसी सप्ताह अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। इनमें से अधिकांश ने अपने प्रमाणपत्रों को सही बताते हुए विश्वविद्यालय से जांच कराने की बात कही थी। जबकि एसआईटी पहले ही इन्हें कूट रचित बात चुकी है। आरोपी शिक्षकों की ओर से अपने प्रमाणपत्रों को सही बताये जाने और विश्वविद्यालय से इनकी जांच करा लेने के दावे के बाद मामले के फिर से लटक जाने की आशंका बन गई थी।
अब विश्वविद्यालय ने बीएड सत्र 2004-05 की फर्जी अंकतालिकाएं निरस्त करने का फैसला लिया है। जब डिग्री ही निरस्त हो जाएगी तो बर्खास्तगी से बचने का रास्ता बंद हो जाएगा। बीएसए के लिए इनकी छुट्टी करना बहुत आसान हो जाएगा।
एसआईटी ने जांच में पाया कि 2004-05 में विश्वविद्यालय में बीएड की कुल सीटें 8000 थीं। इतने ही अभ्यर्थियों का पंजीकरण हुआ। परीक्षा भी इतनों ने ही दी। इतना ही नहीं। रिजल्ट भी आठ हजार का ही जारी हुआ लेकिन मार्कशीट 12500 को दे दी गई। तब मार्कशीट एजेंसी ने बनाई थी।
एसआईटी की सूची के आधार पर परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों को वर्ष 2017 से ही नोटिस दिया जा रहा है। अभी तक सभी जिलों में कार्रवाई नहीं हो पाई है। बड़ा कारण डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अंकतालिकाओं को निरस्त न किया जाना था। अगर निर्णय पहले हो जाता तो प्रदेश में एक साथ 2500 शिक्षक बर्खास्त होते। अब तक 1500 की छुट्टी हो चुकी है।