शिकंजा: सरेंडर की आड़ में लगा है सट्टेबाज अंकुश अग्रवाल

एम डी खान 

 

-पुलिस ने उसे सट्टा, वाहन चोरी, नशे की तस्करी सहित कई मुकदमों में किया है वांछित
-दीवानी में हाजिर होने से पहले क्राइमब्रांच भी पकड़ने के लिए बिछा रही है जाल


आगरा। सट्टा किंग अंकुश अग्रवाल पर पुलिस शिकंजा कसने में लगी हुई है। उसने खुद को बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा लिया है, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने भी इस बार साफ आदेश दिये हैं कि जुआ, सट्टा और क्रिकेट मैच के सट्टा लगाने वालों को जेल भेजकर ही दम लेंगे। उच्चस्तर पर बैठे सट्टा किंग के खाकी के आकाओं ने भी उसकी तरफ से अपने हाथ खींच लिये हैं। इस बार वह भी समझ चुके हैं कि उसे बचाने की कोशिश की तो उनके दामन पर भी दाग लग सकते हैं। उन्होंने भी सटोरी अंकुश को नसीहत दी है कि कोर्ट में सरेंडर कर दें उसी में भलाई है। वर्ना पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो हाथ-पैर भी टूट सकते हैं।  

गौरतलब हैं कि थाना न्यू आगरा, कमला नगर के बृजधाम यमुना विहार निवासी अंकुश अग्रवाल उर्फ अंकुश मंगल पुत्र अनिल कुमार अग्रवाल पिछले 19 साल से क्रिकेट मैच के सट्टे और जुआ के अवैध धंधे में लिप्त है। पिछले दिनों सिकंदरा पुलिस ने उसके साथी संजय जैन उर्फ कालिया को वाहन चोरी और नशा सामग्री की तस्करी के आरोप में जेल भेजा। अंकुश और सूदखोरी रिंकू सरदार को मुकदमें में वांछित किया। पुलिस टीम लगातार उसकी तलाश में दबिश दे रही है। हालांकि हरबार वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता है। कमला नगर में आशू अग्रवाल सहित कई लोगों को नामजद किया था। आरोप था कि आशू अंकुश मंगल की बुक चला रहा था। पुलिस की मेहरबानी से आशू को जमानत में मिलने में आसानी हो गई। उस मुकदमें में अंकुश को भी वांछित किया था। वहीं बल्केश्वर में पुलिस ने छह सटोरी पकड़ें। पुलिस को पकड़े सटोरियों ने बताया था कि अंकुश मंगल, प्रदीप गर्ग, मटरू , बॉबी, राजू तिवारी और अन्नू उपाध्याय सट्टा कराते हैं। पुलिस ने अंकुश सहित छह लोगों को वांछित किया है।

विजय नगर से भागने में रहा सफल
रविवार शाम को पुुलिस ने विजयनगर स्थित शिवालिक अपार्टमेंट से सटोरिये दीपक अग्रवाल उर्फ डीके, हर्षित अग्रवाल को दबोचा। दोनों रिश्ते में बाप-बेटे हैं। उनके पास सट्टेबाजी में प्रयुक्त 4 मोबाइल, लैपटॉप और 45हजार रुपये बरामद किए है। पूछताछ में डीके ने बताया कि वो आने बेटे हर्षित के साथ सट्टा माफिया अंकुश मंगल और सोनू फ्रॉड की दी हुई आईडी से बुक चलाता है। डीके ही पहला सटोरिया है जिसे 1999 में पहली बार एसटीएफ ने सट्टेबाजी करते हुए पकड़ा था। आगरा में क्रिकेट पर सट्टे की शुरूआत डीके ने ही की थी। 1999 के बाद से ही आगरा में सट्टेबाजी का अवैध कारोबार चल रहा है। इस मुकदमें में भी अंकुश अग्रवाल, मंटोला निवासी इमरान और उसके साथी सोनू फ्रॉड को वांछित किया है।

चार करोड़ देकर मैनेज की अफवाह!
अंकुश अग्रवाल ने जिले के उस सख्त अधिकारी को मैनेज करने के लिए कई राज्यों से सिफारिश करवाई है। वह अपने दोस्तों में अफवाह फैला रहा है कि कुछ दिनों तक पुलिस से बचे रहो। पुलिस के एक बड़े अधिकारी को मैनेज करने के लिए एक मोटी रकम दी है। वहीं पुलिस ने अंकुश अग्रवाल को गिरफ्तारी के साथ-साथ उसके हाथ-पैर तोड़ने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। उस पर एक के बाद एक मुकदमा दर्ज करने के पीछे पुलिस की मंशा कुछ और ही है। पुलिस सूत्रों की माने तो अंकुश अग्रवाल इस बार पुलिस के हत्थे चढ़ गया तो वह जीवन में कभी भी जुआा, सट्टा खिलाना तो दूर वह इनका नाम लेने की स्थिती में भी नहीं रहेगा।

इनाम घोषित करने की तैयारी में पुलिस
करीब 20 साल के सट्टेबाजी के सफर में अंकुश अग्रवाल पर कोई बड़ा मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। वह पहली बार ताजगंज में पकड़ा गया था। हालांकि जेल नहीं जा सका था। उसके बाद पुलिस तो उसकी जेब में रहती थी। अधिकारियों के संग बैठकर शराब पीता था। यहीं से उसे गलतफहमी हो गई, लेकिन इस बार उसका पाला आईजी ए सतीश गणेश, एसएसपी बबलू कुमार और एसपी सिटी से पड़ा है। अंकुश पर लगातार चार मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। पुलिस अब उस पर गैंगस्टर की कार्रवाई में लगी हुई है। उसके बाद जल्द ही इनाम घोषित हो सकता है।

जुआरी, सटोरियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही हैं। अंकुश अग्रवाल पर कई मुकदमें दर्ज हैं। वारंट की तैयारी कर ली है, उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम उसके ठिकानों पर दबिश दे रही है। उसे किसी भी हाल में सरेंडर नहीं होने देंगे। उसे पकड़कर पुलिस जेल भेजेंगी।
बोत्रे रोहन प्रमोद
                                                                                                                                                                        एसपी सिटी आगरा।