क्या महिलाए दुःख सहने के लिए ही बनीं हैं- अनीता श्रीवास्तव

आगरा।  बहुत हो चुका महिलाएं अब और अत्याचार नहीं सहेंगी। 21वीं सदी में जीने वाली महिलाएं आज भी अत्याचार, मानसिक उत्पीड़न, और मारपीट सह रही हैं लगता है जैसे वह पुराने जमाने में जी रही हैं। आज की महिला पढ़ी-लिखी पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली है। और अगर वह घर भी संभालती है तो वह भी एक जॉब कर रही है। क्योंकि जो प्रेम वह अपने परिवार को दे रही है, वह कोई तारीफ से कम नहीं है अब समस्या यहां आती है कि कुछ पुरुष उसे अपने पैर की जूती या काम वाली समझ रहे हैं, उसे परेशान कर रहे हैं रुपए पैसे के लिए घर चलाने के लिए बच्चों की आवश्यकताएं पूरा करने के लिए यदि पुरुष को यही करना होता है, तो शादी ही क्यों करते हैं। यह सब पहले सोचना चाहिए अगर पुरष मारपीट करता है तो घर वाले भी उससे कुछ नहीं कह पाते और कोई ठोस कदम नहीं उठाते महिला अपने बचाव में कुछ बोल देती है, तो सभी ससुराली जन उस महिला को ही गलत ठहराते हैं।क्या यह सही है यह उन महिलाओं के लिए है जो आज भी अत्याचार सह रही हैं और कुछ नहीं कर पा रही हैं। मैंने भी कुछ महिलाओं को देखा है पर उनके लिए कुछ नहीं कर पा रही हूं।यह सभी पुरुषों के लिए नहीं है और सभी महिलाओं के लिए नहीं है यह सब उनके लिए है जो अपनी आवाज नहीं उठा पा रही हैं और दिनों दिन इस अत्याचार का सामना कर रही हैं पुरुषों से मेरा यह कहना है कि महिलाओं को कभी कमजोर मत समझिए महिलाओ को भी सम्मान देना सीखिए महिलाएं अपना सारा जीवन आपके और बच्चों के लिए ही जीती हैं। कभी अपनी खुशियों के बारे में नहीं सोचती कृपया यह सब बंद करिए और उनकी भावनाओं को समझिए उनको भी मान सम्मान दीजिये।