मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंची बीजेपी में चल रही पद की कलह

गुटबाजी
-जिला पंचायत प्रबल प्रताप के खिलाफ पास हो गया है अविश्वास प्रस्ताव
-51 जिला पंचायत सदस्य में से एक-एक सदस्य को तोड़ने का चल रहा है खेल

आगरा। चाकू तरबूज पर गिरे या तरबूज चाकू पर दोनों में कटना तरबूज को ही है, ब्रज में प्रचलित यह कहावत आजकल भाजपा में चल रही कलह पर फिट बैठ रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद,  पार्टी के अंदर दो गुटों का अखाड़ा बन गया है। एक ओर जिले के दो माननीय के साथ कई जनप्रतिनिध हैं, तो वहीं दूसरी तरफ दूसरे जिले के माननीय हैं, जो पहले जिले में अपनी ताकत का अहसास करा चुके हैं। दोनों तरफ अहम की लड़ाई है। इस लड़ाई में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिले में पद को लेकर भाजपा में चल रही अर्न्तकलह हाईकमान तक पहुंच गई है। आखिर अध्यक्ष कौन रहेगा इसका फैसला बारह जुलाई को हो सकता है, हालांकि इस दौरान मुख्यमंत्री ने संज्ञान ले लिया तो यथास्थिती भी रह सकती है।

दरअसल जिला पंचायत अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल के खिलाफ 21 जून को 28 सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव दिया है। इसे जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने स्वीकार भी कर लिया है। 12 जुलाई को बहस के बाद मतदान कराने की तिथि दी है। इसमें अध्यक्ष प्रबल प्रताप को बहुमत साबित करना होगा। जिला पंचायत के 51 सदस्य नये जिलाध्यक्ष का फैसला करेंगे। 12 जुलाई को जिला पंचायत सभागार में सुबह 10.30 बजे से अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होगी। इसके बाद अध्यक्ष को बहुमत साबित करना होगा। इसके लिए उन्हें कम से कम 26 सदस्यों के समर्थन की जरूरत होगी। वही अगर सूत्रों की माने तो दोनों गुटों के पास 24-24 सदस्य हैं।  ऐसे में  बाकी बचे 3 सदस्य अभी तक किसी पक्ष में नहीं हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष कोई भी बने इसमें सभी जिला पंचायत सदस्य चांदी काट रहे हैं। वह चार साल के कार्यकाल में तीन बार अपनी जेब गरम कर चुके हैं।

भाजपा ने किया था सपा का तख्ता पलट
याद रहे, कि वर्ष 2015 जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। इसमें समाजवादी पार्टी की कुशल यादव अध्यक्ष बनी थीं। वर्ष 2017 में प्रदेश की सत्ता बदली तो मार्च 2018 में प्रबल प्रताप ने तख्ता पलट करते हुए सपा की कुशल यादव की कुर्सी पर कब्जा कर लिया था। वह सवा साल ही अध्यक्ष रह पाए। इस बीच उन्ही की पार्टी के एक गुट ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रबल प्रताप को जिला पंचायत की कुर्सी पर बैठाने में  एससी आयोग अध्यक्ष डा. राम शंकर कठेरिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। लोकसभा चुनाव से पहले जब श्री कठेरिया और प्रो. एसपी सिंह बघेल के बीच विवाद गहराया तो प्रबल प्रताप सिंह सांसद कठेरिया के साथ खड़े हो गए। उन्होंने एसपी सिंह बघेल के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस तक कर डाली। जबकि एसपी सिंह बघेल तब प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। 


जिले के माननीय ने दिखाई हनक
तमाम अटकलों को एक ओर करते हुए एसपी सिंह बघेल न सिर्फ आगरा लोकसभा सीट से भाजपा की टिकट लाने में सफल रहे बल्कि सांसद भी चुने गए। सूत्रों की माने तो इस बार तख्ता पलट के पीछे भाजपा के दो माननीयों और कई वरिष्ठ नेताओं का अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले खेमे को समर्थन है। दो माननीयों का दूसरे खेमे को समर्थन देने का कारण जिला पंचायत अध्यक्ष के साथ खड़े माननीय को अपनी ताकत का अहसास कराना मात्र है। जो हाल में दूसरे जिले से सांसद हैं। इस अविश्वास प्रस्ताव से भाजपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई है। प्रबल प्रताप समर्थक इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से लेकर हाईकमान तक पहुंच गये हैं। उनका कहना है कि आखिरी विरोध किसका किया जा रहा है। दोनों तरफ भाजपा ही है।


पूर्व अध्यक्ष के एक तीर से दो निशान
प्रबल प्रताप की कुर्सी गिराने में पूर्व अध्यक्ष पति अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसमें उनके दो लाभ हैं। एक तो यह कि प्रबल प्रताप ने भाजपा सरकार आते ही उनका विकट गिरा दिया। इसलिए वह दूसरे खेमे में समर्थन कर रहे हैं, दूसरा फायदा यह है, प्रबल प्रताप के खिलाफ जो भी जिला पंचायत सदस्य अध्यक्ष बनने को है। उसने सपा सरकार में पूर्व अध्यक्ष को वोट देकर दोस्ती निभाई थी। जबकि वह खुद बीजेपी के थे। पूर्व अध्यक्ष पति कुछ इस तरह एक तीर से दो निशाने लगा रहे हैं।