देशभर की ‘फ्राड कंपनियों’ के लिए मुफीद बना मथुरा

कर्मयोगी गुप की ठगी का शिकार हुए निवेशकों द्वारा अपनी लडाई लडने के लिए डीडी प्लाजा में खोला गया कार्यालय।

-इस सूची में कर्मयोगी ग्रुप का भी नाम हुआ दर्ज
-करोड़ों रुपये का फ्रॉड कर भागीं कल्पतरु और कल्पवट
-रीयल स्टेट सेक्टर की कई कम्पनियां भी शक के दायरे में
-प्रदेश भर में चर्चित रहा ठग शैलेंद्र अग्रवाल की जड़ें भी मथुरा में 
-एसर के निदेशकों का मामला भी है सुर्खियों में

मथुरा। अभी तक हार्डकोर क्रमीनल के लिए मुफीद रहा दो राज्यों का सीमावर्ती जनपद मथुरा अब ’जालसाजों की ऐशगा’ बना हुआ है। विगत कुछ दिनों में ही करोड़ों रुपये की ठगी कर भागने वाली कई कम्पनियों ने मथुरा में अपना हैड आफिस बनाया। इनमें सबसे ताजातरीन मामला कर्मयोगी ग्रुप का है। जिनमें कल्पतरु और कल्पवट के मामले नये हैं। इसने अलावा भी नामीगिरामी कई लोग और कंपनी मथुरा से ही अपना कारोबार करते रहे हैं जिन पर करोड़ों रुपये की जालसाजी के आरोप लगे और साबित भी हुए। यहां काम कर रहीं कई रीयल स्टेट कंपनियां भी शक के दायरे में हैं। प्रदेश भर में ठगी के लिए चर्चित शैलेंद्र अग्रवाल की जडें भी मथुरा में ही जमी हैं। 
कल्पतरु ग्रुप, कल्पवट कंपनी के बाद अब कर्मयोगी ग्रुप का का बड़ा घपला सामने आया है। हल्ला तब मचा जब कर्मयोगी गु्रप के निवेषकों को अपना पैसा डूबता हुआ लगा। अब तक अपने अपने स्तर पर इस ग्रुप के खिलाफ लडाई लड रहे तमाम लोगों ने रविवार को एक जुट होते हुए कर्मयोगी ग्रुप निवेषक संघर्ष समिति के नाम से समिति का गठन किया। यह समिति कम्पनी की लासाजी का षिकार हुए लोगों को एक जुट कर कंपनी के खिलाफ लडेगी। संघर्ष समिति का कार्यालय डीडी प्लाजा दुकान नम्बर 17 में बनाया गया है। कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर हुई बैठक में समिति के अध्यक्ष नरेष पालीवाल ने बताया कि इस ग्रुप के निदेषकों मथुरा में करीब दो सौ निवेषकों के साथ धोखाधडी कर करोडों रूपये हडप लिये हैं। संघर्ष समिति ठगी का षिकार हुए निवेषकों की लडाई लडेगी। समिति के सचिव भारत भूषण ने बताया कि इन लोगों ने 9-10 कंपनियां अलग अलग नामों से बनाई हुई हैं। इन कंपनियों से अपना नाम हटाकर कर्मचारियों को डायरेक्टर बनाते जा रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से कई बार इस बारे में षिकायत की गई है लेकिन किसी भी स्तर से ठगी का षिकार हुए लोगों की कोई मदद  नहीं हो सकी है। दूसरे राज्यों में भी कर्मयोगी ग्रुप ने इसी तरह की ठगी की है। 
कल्पतरू और कल्पवट की कहानी भी इससे जुदा नहीं है। इस कंपनी के आफिस बरेली, कानपुर, मुरादाबाद, रामपुर, फतेहपुर, लालगंज सहित प्रदेश के कई जिलों में खोले गए। कंपनी का मुख्यालय मथुरा में था। यह कंपनी प्लॉट, फ्लैट और एफडी के नाम पर लोगों से पैसा लगवाती थी। बताया जाता है कि इस कंपनी ने कई जिलों में अपने आफिस रातों रात बंद कर दिए। इससे निवेशकों में हड़कंप मच गया और मथुरा के चक्कर लगाने लगे हैं। कंपनी के घपले का शिकार हुए कानपुर निवासी अमित सिंह, राकेश सिंह, बीना, सहदेव सहित 12 महिला और पुरुष सौंख अड्डा के पास स्थित कंपनी के कार्यालय पर पहुंचे तो पता चला कि कार्यालय बंद हो गया है। इस कंपनी ने एजेंटों के माध्यम से करीब 100 करोड़ से ज्यादा रुपये जमा कराए हैं। अब दो साल से कंपनी भुगतान नहीं कर रही है। कंपनी के कर्मचारियों द्वारा भुगतान के एवज में दिए गए चेक भी बाउंस हो चुके हैं। कंपनी के बॉड पर पते के रूप में मथुरा स्थित अतिथि पैलेस जंक्शन सौंख अड्डा लिखा है। कानपुर सहित विभिन्न जनपदों में कंपनी कार्यालय बंद कर चुकी है। इसकी रिपोर्ट कानपुर के थाना रायपुरवा में अमित सिंह ने अपने परिवारीजनों की धनराशि को लेकर दर्ज कराई है, लेकिन इस पर अब तक कोई कार्रवाई न होने की स्थिति में पीड़ित अब मथुरा आए हैं। बुधवार को एसएसपी कार्यालय से उन्हें कार्रवाई के लिए कंपनी कार्यालय क्षेत्र हाईवे भेज दिया गया।

बाहर के लोगों को बनाते हैं शिकार 
कान्हा की नगरी की ओर लोगों का आकर्षण रहता है। यहां बसने की इच्छा सबकी होती है। तमाम धनवान लोग ऐेसे हैं जो इस पवित्र्ा धरती पर अपने लिए जमीन का एक टुकडा खरीदने की इच्छा रखते है। ये लोग यहां रहते नहीं हैं लेकिन फिर भी ब्रज में अपना घर होने के सुखद अहसास को सजोये रहते हैं। इस लोगों को ठगी करने वाले अपना पहला शिकार बनाते हैं। ठगी होने के बाद भी ये विवाद में नहीं पडते हैं। इससे ठगों को मोटा मुनाफा मिलता है लेकिन इनके साथ कुछ स्थानीय और छोटे लोग भी इनके जाल में फंस जाते हैं। जो अपना पैसा निकालने के लिए लडते हैं। 

कर्मयोगी गुप की ठगी का शिकार हुए निवेशका