बच्चों में हो रहे नेत्र कैंसर के जागरूकता के लिए वॉकथॉन का आयोजन

नई दिल्ली: बच्चों में नेत्र कैंसर और नेत्र कैंसर प्रबंधन (ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी) के क्षेत्र में हालिया प्रगति के बारे में लोगों में  जागरूकता पैदा करने और प्रसार करने के लिए समर्पित उद्देश्य और सतत प्रयास के तहत   सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स ने राष्ट्रीय  राजधानी में वॉकथॉन का आयोजन किया।
 
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर, सेंटर फॉर साइट एंड वूमेनाइट ने मानव विकास और परिवार सशक्तीकरण विभाग (एचडीएफई) के सहयोग से ‘बच्चों में नेत्र कैंसर’ पर एक जन जागरूकता अभियान चलाया। इसकी योजना बहुत पहले  से चल रही थी। सबसे पहले रेटिनोब्लास्टोमा के बारे में लोगों को जागरूक करने की परियोजना नवंबर 2017 में एक छात्र संकाय पहल के रूप में शुरू हुई थी, जिसके तहत छात्रों ने स्वास्थ्य केंद्रों में टीकाकरण कार्यक्रम से खुद को जोड़ा। उन्होंने स्मार्ट फोन से इसकी स्क्रीनिंग के बारे में जागरूकता पैदा की।
 
इस अभियान में छात्र, संकाय, कैंसर विषेशज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और रेटिनोब्लास्टोमा से निजात पा चुके एक व्यक्ति शामिल थे। इस परियोजना की परिकल्पना निर्मला मुरलीधर (परियोजना समन्वयक) के द्वारा डॉ. संतोश  जी होनवर और डॉ. विकास मेनन के मार्गदर्शन में की गई थी। पदमश्री अवार्डी और सेंटर फॉर साइट ग्रुप ऑफ़  हाॅस्पिटल्स के अध्यक्ष और चिकित्सा निदेशक डॉ. महिपाल सचदेव ने कहा, “रेटिनोब्लास्टोमा के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आगे बढ़ने जैसी जागरूकता पहल इस बात की पुश्टि करती है कि अब लोगों को हर साल व्यापक नेत्र परीक्षण कराकर अपने बच्चे के नेत्र स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिष्चित कराने की आवश्यकता है। यहां तक कि तकनीकी प्रगति से इसके उपचार के परिणामों में लगातार सुधार हो रहा है - लेकिन चुनौती केवल इन उपचारों को सभी के लिए सुलभ बनाना है। इस अवसर पर हम पूरे समाज को सचेत करना चाहते हैं कि समय पर निदान हो जाने पर ट्यूमर का इलाज होने की पूरी संभावना होती है। ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है। इसका समय पर पता लगाने से न केवल ट्यूमर का इलाज किया जा सकता है, बल्कि आंखों में दृष्टि को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।”
 
रेटिनोब्लास्टोमा दुनिया भर में बच्चों में सबसे आम प्रकार का आंखों का कैंसर है। भारत में हर साल रेटिनोब्लास्टोमा के 1500 से अधिक मामले सामने आते हैं। इससे आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे प्रभावित होते हैं। इसके सामान्य लक्षणों में व्हाइट आई रिफ्लेक्स (पुतली का सफेद होना/ ल्यूकोकोरिया), आंख का असामान्य विचलन (भैंगापन), नजर कमजोर होना, आंख का लाल होना और दर्द होना और उभरी हुई आंखें षामिल हैं। लगभग 40 प्रतिशत मामलों में यह ट्यूमर माता-पिता से बच्चे में पारित (हेरिटेज) हो सकता है, इसलिए रेटिनोब्लास्टोमा में आनुवंशिक जांच भी महत्वपूर्ण है। रेटिनोब्लास्टोमा का प्रबंधन षुरूआत से ही लंबा सफर तय कर चुका है। इसका फोकस अब जीवन को बचाने से लेकर आंख बचाने पर है और अब इसका फोकस दृष्टि को बचाने पर ही केंद्रित हो गया है।
 
नेत्र कैंसर का समय पर निदान महत्वपूर्ण है। सेंटर फॉर साइट ग्रुप नेत्र देखभाल प्रदाता होने के नाते ऑक्यूलर ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और उसने रेटिनोबलास्टोमा से पीड़ित कई बच्चों का सफलतापूर्वक इलाज किया है।
 
डॉ. महिपाल ने कहा, “लोगों को इसके प्रारंभिक लक्षणों को आसानी से पहचानने और पता लगाने के लिए, स्थिति से अवगत होने की आवश्यकता है। यदि किसी व्यक्ति की आंख के कॉर्निया में सफेद रिफ्लेक्स दिखता है, तो उसे तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। माता-पिता से अनुरोध है कि वे अपने बच्चे की दृष्टि  पर बारीकी से नजर रखें और उनकी आंखों की नियमित जांच कराएं।”