एक लाख से अधिक बच्चों का भोजन पशुओ को खिलाना पडा

मथुरा। अधिकारियों की लापरवाही से शनिवार को मथुरा में 1.10 लाख बच्चों का मिड डे मील खराब हो गया। लाखों रुपयों का तैयार कढ़ी-चावल यूं ही फेंकना पड़ा। राजकीय अवकाश होने के बाद भी इसे घोषित करने में इतनी देर कर दी गई कि तब तक मिड डे मील तैयार कर स्कूलों को भेजा जा चुका था।
शनिवार को बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की छुट्टी को लेकर असमंजस था। सुबह 8.31 बजे तक बेसिक शिक्षा के स्कूलों में छुट्टी की कोई घोषणा नहीं की गई थी। इस कारण अक्षय पात्र में मेन्यू के हिसाब से मथुरा के 2073 स्कूलों के करीब 1.10 लाख बच्चों के लिए कढ़ी और जीरा राइस मिडडे मील के रूप में तैयार कर लिया गया। इसे बर्तनों में भरकर गाड़ियां दूरदराज के स्कूलों को रवाना भी कर दी गईं। सुबह 8.32 बजे बीएसए ने जनपद के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा का संदेश व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया। ये ग्रुप जनपद के एबीआरसी और अक्षय पात्र के पीआरओ को शामिल करके बनाया गया है। इससे अक्षयपात्र प्रबंधन में ऊहापोह की स्थिति बन गई। आनन फानन में सभी गाड़ियां वापस बुलानी पड़ीं। पूरे खाने को पशुओं (गौशाला नहीं) के बाड़े में डलवाना पड़ा।

हमारी बात नहीं सुनी गई
 अक्षयपात्र अधिकारियों की लापरवाही से शनिवार को मथुरा में 1.10 लाख बच्चों का मिड डे मील खराब हो गया। लाखों रुपयों का तैयार कढ़ी-चावल यूं ही फेंकना पड़ा। राजकीय अवकाश होने के बाद भी इसे घोषित करने में इतनी देर कर दी गई कि तब तक मिड डे मील तैयार कर स्कूलों को भेजा जा चुका था।

शनिवार को बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों की छुट्टी को लेकर असमंजस था। सुबह 8.31 बजे तक बेसिक शिक्षा के स्कूलों में छुट्टी की कोई घोषणा नहीं की गई थी। इस कारण अक्षय पात्र में मेन्यू के हिसाब से मथुरा के 2073 स्कूलों के करीब 1.10 लाख बच्चों के लिए कढ़ी और जीरा राइस मिडडे मील के रूप में तैयार कर लिया गया। इसे बर्तनों में भरकर गाड़ियां दूरदराज के स्कूलों को रवाना भी कर दी गईं। सुबह 8.32 बजे बीएसए ने जनपद के स्कूलों में छुट्टी की घोषणा का संदेश व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दिया। ये ग्रुप जनपद के एबीआरसी और अक्षय पात्र के पीआरओ को शामिल करके बनाया गया है। इससे अक्षयपात्र प्रबंधन में ऊहापोह की स्थिति बन गई। आनन फानन में सभी गाड़ियां वापस बुलानी पड़ीं। पूरे खाने को पशुओं (गौशाला नहीं) के बाड़े में डलवाना पड़ा।

गौशाला नहीं भिजवाया जा सकता था इसे
गाय न तो चावल खाती है और न ही दही। चूंकि कढ़ी में दही का इस्तेमाल होता है, इसलिए ये भी गायों के लिए बेकार थी। इसलिए कढ़ी और चावल दोनों को अन्य पशुओं के बाड़े में भिजवाना पड़ा।