लोहामंडी चौराहा पर सुबह चार बजे खुल जाता है नशे का अड्डा

---खाकी की मेहेरबानी ---


-शराब ठेका खुलने का समय सरकार ने नियत किया है सुबह दस से रात दस बजे तक
-शहर में दस बजे से पहले दुकान के पिछले रास्ते से बेची जा रही है शराब और टिंचर-जिंजर

एम डी खान  
वरिष्ठ संवाददाता अग्र भारत 

 

आगरा। ‘मत पूछ उसके मैखाने का पता ऐ साकी, उसके शहर का तो पानी भी नशा देता है’ जी हां ये शायरी लोहामंडी चौराहा पर एकदम सटीक बैठती है। अल सुबह यहां का मजर अगर कोई देख ले, तो उसे बिना शराब पिये ही नशा हो जाये। शासन-प्रशासन के क्या नियम हैं, यहां के शराब ठेकेदारों के लिए मायने नहीं रखते, आने वाले नशेड़ियों के लिए वह अपना दरबार हमेशा पिछले रास्ते खोलकर रखते हैं। यह सब हम सुनी हुई बाते नहीं कर रहे, यहां का नजारा अग्र भारत की टीम ने अपने कैमरे में कैद भी किया है। पुलिस इंस्पेक्टर से इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने ऐसे रियक्ट किया, जैसे हमने दूसरा ताजमहल बनने की जानकारी उनको दी हो। जबकि पुलिस बूथ दस मीटर की दूरी पर है। पुलिस को चौराहे पर चल रही हरेक अवैध गतिविधी की जानकारी है। पुलिस की बिना मर्जी के एक तिनका भी नहीं हिल रहा है। पुलिस चंद लाभ के लिए चौराहे पर धड़ल्ले से शराब के साथ जहर (टिंचर-जिंजर) बिकवा रही है। गरीब, मजदूर पूरे दिन में जो भी कमाते हैं, यहां सस्ते नशा में गवां जाते हैं।

चौराहे का आंखो देखा हाल.....
आपका चैनल अग्र भारत नशे के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है। हर दिन नशे के कारोबार पर नया खुलासा हो रहा है। उसी क्रम में लोहामंडी, शाहगंज, बोदला चौराहे व अन्य जगहों पर चल रही शराब व टिंचर-जिंजर की दुकानों की हकीक्त जानी। उसमें लोहामंडी चौराहा का हाल कुछ अलग ही था। यहां देशी शराब और टिंचर-जिंजर की दुकानों के पीछे लोगों की भीड़ लगी रहती है। लोगों के हाथ में छोटी-छोटी शराब व टिंचर-जिंजर की शीशियां थीं। वह प्लास्टिक के गिलासों में शराब पीते दिखे। टीम ने अपने कैमरे से वीडियो रिकार्डिंग बनाना शुरू कर दी। यह देख वहां से लोग भागने लगे। ठेका पर पिछले रास्ते मालिक ने छोटा सा होल (छेद) बना रखा है। उसमें हाथ डालकर लोग शराब खरीदते हैं। उसके अतिरिक्त बराबर में टिंचर-जिंजर की दुकान है। दिखावे को दुकान का दरवाजा बंद रहता है, लेकिन टिंचर-जिंजर वह उपलब्ध करा रहा है। ड्रग इंस्पेक्टर दीपक नरेश मोहन का कहना है कि टिंजर सिर्फ मेडीकल पर बेची जा सकती है। टिंजर घाव, जख्म आदि पर ही इस्तेमाल होती है, लेकिन चंद फायदे के लिए संचालक टिंजर को नशे में बेच रहे हैं। डेढ़ मिनट के वीडियो में शराब ठेके व टिंचर की दुकान की गतिविधी कैद हुई हैं।

नशे की लत ने बर्बाद किये घर
जगदीशपुरा निवासी रमेश (काल्पनिक) का कहना है कि उसका भाई मजूदरी करता है, पूरे दिन में जो भी कमाता है। वह सबकुछ लोहामंडी स्थित शराब के ठेके और टिंजर-जिंजर पीने में गवां आता है। कई बार उसे रात में उठाकर लाये हैं। सुबह होते ही वह चौराहे पर पहुंच जाता है। आये दिन पत्नी से झगड़ा करता है। घर के बर्तन तक बेच चुका है। बच्चे दाने-दाने को मोहताज है। उसकी पत्नी घरों में झाड़ू-पौंछा का काम करते बच्चों को पाल रही है। शहीद नगर के मजीद का भी ऐसा ही हाल है। वह जूते का काम करने लोहामंडी में आता है। शनिवार और रविवार को तो वह घर ही नहीं पहुंचता। हफ्तेभर की कमाई को वह टिंजर-जिंजर और देशी शराब के ठेके पर उड़ा देता है, मना करने पर झगड़े पर उतर आता है। कई बार बात पुलिस तक पहुंची है, लेकिन नशे की लत ने उसका मानसिक संतुलन भी खराब कर दिया है।

नशा पूरा करने को करते हैं चोरियां
छोटी-छोटी चोरियों की बात करें, तो थाना जगदीशपुरा बहुत आगे है। यहां दुकानों के सामने से तख्त, लोहे की रेलिंग, हलवाई की भट्टी, लोहे की चदद्र आदि चोरी वारदात आये दिन होती हैं। दुकानदार इन चोरियों की सूचना पुलिस को दें, तो पुलिस फटकार लगाकर भगा देती है। नशाखोर इन सामानों को चोरी कर जो रुपया मिलता है, उससे नशा पूर्ति करते हैं। ऐसे कई चोरियों के खुलासे हुए हैं, जिसमें पकड़े गये आरोपियों ने कबूल किया था कि वह नशा पूरा करने के लिए चोरी करते हैं। थाना स्तर पर विवेचक इतने गैर जिम्मेदार हैं कि वह अधिकांश चोरी के मामलों में खानापूर्ति कर एफआर (अंंतिम रिपोर्ट) लगा देते हैं। अधिकारी भी कभी एक्शन नहीं लेते हैं। इससे विवेचक के हौंसले बढ़ते हैं और चोर कभी पकड़े नहीं जाते, तो उनकी भी हिम्मत बढ़ती है।


कैमरा देख उतर गया नशा
अग्र भारत की टीम चौराहे पर सुबह पांच बजे से सुबह दस बजे तक तीन बार गई। वहां हर बार एक जैसा ही माहौल मिला। टीम को देख लोग भाग जाते। पानी, नमकीन और गिलास बेचने वाले भी दुकान खुली छोड़कर छिप जाते, लेकिन हमारे वहां से निकलते ही वही हालात बन जाते। कुछ तो ऐसे भी थे, जो हाथ में गिलास लेकर ही भागने लगे। रिपोर्टर के पूछने पर हाथ शराब की शीशी लिये युवक बोलता है, मैं तो आज पहली बार आया हूं। इसी तरह सभी लोगों पर अलग-अलग बहाने थे। छेद में शराब दे रहे व्यक्ति से  बात करना चाही तो वह अंदर छिपकर बैठ गया। टिंजर-जिंजर बेच रहा व्यक्ति अनजान बनकर खड़ा हो गया। उसे पूछा तो बगले झांकने लगा।

ये बोले एक्सपर्ट
शराब ठेका खुलने का समय सुबह दस बजे से रात दस बजे तक का है। एक अप्रैल से नौ बजे से रात ग्यारह बजे तक हो जायेगा। टिंजर-जिंजर का इस्तेमाल नशे में हो रहा है। यह पूरी तरह से जहर है। इसे लगातार पीने वाले व्यक्ति की उम्र 15 से 20 माह है। शराब में हल्कोहल 42.8 प्रतिशत होती है। यह सरकार से सर्टीफाइट होती है। वहीं टिंजर-जिंजर में एल्कोहल 90 से 100 प्रतिशत होेता है। इससे मरने वालों की सूचना मिलती रहती हैं। यह नशा एक निम्न वर्ग करता है। इनके परिजन पुलिस कार्रवाई चाहकर भी नहीं कर पाते। दस-बीस हजार रुपये देकर परिजनों का मुंह बंद कर दिया जाता है। परिवार के लोग भी पुलिस के पचड़े से बचने के लिए चुप हो जाते हैं। टिंचर-जिंजर बेचने वालों की पहुंच बीट के सिपाही से लेकर थाना प्रभारी के हमराह तक रहती है। यह दोनों ही मामलों को मैंनेज करते हैं।