मीडिया के हस्तक्षेप के बाद चोरी के आरोप में बच्चों को यातनाएं देने वालों के खिलाफ लिखा मुकदमा चार की हुई गिरफ्तारी

आगरा के थाना शाहगंज के क्षेत्र कमाल खा में चोरी के आरोप में एक पानी के प्लांट के संचालक अबरार के द्वारा एक ही परिवार के 5 लोगों को कमरे में बंद करके अमानवीय यातना देने के मामले में मीडिया के हस्तक्षेप के बाद आखिर में थाना शाहगंज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर ही लिया। आगरा के थाना शाहगंज के कमाल खा क्षेत्र में अबरार नाम के एक दबंग के द्वारा एक ही परिवार के 5 लोगों को चोरी के आरोप में अपने घर के तीसरी मंजिल पर बंधक बनाकर मारपीट करने और बिजली के करंट लगाने सहित अमानवीय यात्राओं की सारी हदें पार करने का मामला संज्ञान में जब आया जब पीड़ित परिवार के एक 8 वर्षीय बच्चे समीर के द्वारा डायल 112 पर घटना की जानकारी दी और सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची थी और सभी पांचों बंधकों को मुक्त कराया था।

पुलिस के द्वारा की गई इस कार्रवाई की जानकारी जैसे ही मीडिया कर्मियों को हुई तो मीडिया ने इस पूरे मामले पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित करते हुए खबर को प्रमुखता से दिखाया जिस पर आगरा पुलिस हरकत में आई और आखिर में पुलिस को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करना ही पड़ा ।सबसे बड़ी बात यह थी पुलिस इस पूरे मामले को मामूली घटना में तब्दील कर रफा-दफा करना चाहती थी क्योंकि कुछ स्थानीय छोटू भैया नेता इस मामले में पैरवी कर मामले को निपटाना चाहते थे जिस पर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया था उसे थाने से 151 में चालान कर थाने से जमानत दे दी थी जब पीड़ित के द्वारा रात्रि में अपने साथ हुई घटना की तहरीर दी गई तो पुलिस ने रात्रि में उसकी तहरीर नहीं ली और सुबह जब मीडिया के द्वारा खबर को प्रमुखता से दिखाया गया तो थाना पुलिस हरकत में आई और इसके बाद पीड़ित परिवार के मुखिया को चौकी प्रभारी अपने साथ ले गए और थाने में ले जाकर  तहरीर लिखवाई  यह बात पीड़ित के द्वारा मीडिया को बताई गई और इसके बाद में आरोपियों की गिरफ्तारी की गई ।
 

आखिर में मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना के आरोपियों को बचाने में स्थानीय पुलिस इतनी दिलचस्पी क्यों है कि पहले तो गिरफ्तार आरोपी को 151 में थाने से जमानत दी गई और बाद में पीड़ित का मुकदमे की तैयारी नहीं ली गई और जब तहरीर को अपने हिसाब से बदलवा करके लिखवाया जिसमें घटना की धारा एक कमजोर हो सके और आरोपियों को न्यायालय में उसका फायदा मिल सके।