इलाज न मिलने पर 9 दिन की बच्ची ने तोड़ा दम, नहीं पसीजा हॉस्पिटल कर्मियों का कलेजा

 

आगरा। आगरा प्रशासन लाख दावे कर ले, प्राइवेट हॉस्पिटल्स की सूचि जारो कर ले पर प्राइवेट हॉस्पिटल्स संचालक किसी भी सूरत में मरीजों को उपचार देने में असमर्थता जाहिर कर रहे है। सबका एक ही राटा रटाया सा जवाब की साहब कोरोना काल चल रहा है। हम चाहा कुछ नहीं कर सकते। इलाज न मिलमिल पाने से मंगलवार देर रात 9 दिन की बच्ची की मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार काजीपाड़ा निवासी मनजीत सुतैल की पत्नी उषा सुतैल की 9 दिन की बेटी की तबियत ख़राब हो गई। उन्होंने शहर भर के अस्पतालों में भागते रहे पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। पीड़ित ने बताया की उसकी बच्ची की तबियत अचणक से ख़राब हो गई तो वो उसके लेकर सबसे पहले अरुण हॉस्पिटल लेकर गए पर बच्चे को भर्ती नहीं किया गया। बिना समय गवांये वो शांति मांगलिक हॉस्पिटल, डॉक्टर अभय यादव, डॉक्टर सुनील कोहली के अस्पताल पहुचेत पर NICU न मिल पाने के कारण नन्ही बच्ची ने दम तोड़ दिया।

माँ का रो रो कर बुरा हाल
वो कभी बच्ची को अपने अंचल में छुपा लेती तो कभी लोरी सुनती। सब कुछ ठीक चल रहा था की अचानक तबियत ख़राब हुई और बेटी को अस्पताल लेकर भागे पर बेटी को इलाज नहीं मिला और वो मर गई। कोरोना महामरी के चलते प्राइवेट हॉस्पिटल्स में इलाज नहीं मिल पा रहा है। उषा ने सरकार से सवाल पूछा की जब वो शराब की दूकान खुलवा सकते हैं, वो शराब जिसको पीकर किसी का भला नहीं हुआ उल्टा मौत को ही दावत देती है, इसलिये उस पर सरकार चेतावनी भी डलवाती है तो फिर अस्पताल क्यों नहीं खोले जा रहे है।

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