निक्कमे औ लालचियों व पैसा कमाने वालों का जमाबाड़ा है होम डिलीवरी!

गोपाल गुप्ता 

मुरैना ! प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की इस कोरोना वायरस से बचाने के लिये सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उडा़ रहा है जिला प्रशासन उसका मुरैना खाद्य विभाग! ईसका उदाहरण जब देखने को मिला तब 21 इस दिवसिये लाॅक-डाऊन में आठ आदमी का परिवार आटा और मैदा के लिए तरसता दिखा! खानपीन विभाग के एक भ्रष्ट और कामचोर अधिकारी के नेतृत्व में चल रही होम डिलीवरी के सरमायेदारों से फोन कर आटे के लिए गुहार लगा रहे परिवार के मुखिया को बार-बार फोन करने पर जबाव कल रात्री से मिल रहा है कि अभी थोड़ी देर में गाड़ी आपके मोहल्ले में पहुंच रही है! बेचारा मुखिया पुलिस के डण्डों बचता-बचाता तय समय पर पंचायती धर्मशाला के गेट पर आज 12 बजे ही पहुंच गया! जब पुलिस वालों ने उसे डण्डें के जोर पर हड़काया तो उसने पेट की आग से तड़पते हुये अपने पूरे परिवार के पूरे बाक्या से पुलिस के जवानों को अवगत कराया तो पुलिस के जवानों ने संवदना व्यक्त करते हुये उस मधुमेह मरीज से पीड़ित व्यक्ति को जिसे सरकार अनुसार घर से ही निकलना चाहिये, प्रेमपूर्वक बिठाया और पानी पिलाया और होम जिला प्रशासन और उस चोट्टे खानपीन अधिकारी द्वारा कागजों में और क्लेक्टर मुरैना की वाहवाही लूटने के लिए कथित तौर पर चलाई जा रही डिलीवरी होम गाड़ी का इंतजार करने के लिए कहा गया! मगर जब 12 बजे से शाम पांच बज गये और उस कामचोर भ्रष्ट खानपीन अधिकारी द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही होम डिलीवरी गाड़ी नहीं आई तो उस बिचारे की आंखों में पानी आ गया, उसकी स्थिति को देखते हुये ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों की आंखों में भी पानी आ गया! जब फोन लगाकर होम डिलीवरी वाहन की लोकेशन ली गई तो मालूम हुआ की क्लेक्टर कार्यालय के सामने तेलीपाड़ा में संतोषी पान वाले के सामने गाड़ी खड़ी है वहां जाकर आटा लें लें!

जब गिरता -पड़ता चार बच्चों का बाप तेलीपाड़ा पहुंचा और वहां 15 मिनिट बाद वो कथित गाड़ी आई और क्लेक्टर मुरैना द्वारा इस भीषड़ आपदा में प्रत्येक परिवार के खानपीन रसद पहुंचाने का दावा करने वाली व सबके भले का दावा करने वाली जब ये गाड़ी आई तो सोशल डिस्टेंस की धज्जियां उड़ाती हुई बीच चोराहे पर खड़ी हो गई! वो डायबिटीज का मरीज इतनी भीड़ में अपनी जान जोखिम में डालते हुये गाड़ी के पास पहुंचा और उसने आटा मांगा तो उससे कहा गया कि आटा नहीं है, ये सुनकर उसके पेरों तले जमीन खिसक ग ई। जीवन के लिए जिस जरुरी चीज आटे से वो अपने परिवार का पेट भरना चाहता था और जिसके जिला क्लेक्टर निरंतर दावा कर रहीं हैं वो ही आटा उसे पैसे खर्च करने के बावजूद नहीं मिला! जब उसने बार-बार खानपीन अधिकारी द्वारा छोड़े गये अपने चेलों से जो सामान बैचने वालों से आटा देने की गुहार लगाई तो वे नक्कमे खानपीन अधिकारी और क्लेक्टर को ही कटघरे में खड़े करते हुये कह रहे थे कि आटा नहीं है तो हम क्या करें, हमतो अधिकारियों की बैगार काट रहे हैं! 

प्रदेश के कथित मामा मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी आपने गत दिवश प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से और पन्द्रह दिन लाॅकडाऊन बढ़ाने की अनुशंसा की है! क्या ये अनुशंशा पैसे खर्च करने और सुबह से शाम तक आटे का इंतजार करने वाले और आपकी क्लेक्टर के द्वारा आश्वसत कराने के बावजूद आटे के अभाव में भूखे रहने वाले और दम तोड़ने वाले परिवार की शर्त पर की गई है?अरे शर्म आनी चाहिये कि एक तरफ आज इस संकट के दौर में समाजसेवी संस्थाएं और दानवीर कर्ण खुले हाथों से गरीब, मजदूर और मजलूमों के खाने-पीनें वायवस्था कर रही हैं और वहीं दूसरी तरफ शासन-प्रशासन पैसे खर्च करके स्वाभिमान से जीने वालों लोगों के साथ आटे जैसी जरुरत की चीजों को उपलब्ध कराने में नाकाम हो रहा है!