रेलवे खाली डिब्बों और केबिन में कोरोना संक्रमित लोगों के लिए बनाएगा आईसीयू

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे कोरोना वायरस से संक्रमित यात्रियों के लिए अलग डिब्बे और केबिन बनाने पर विचार कर रहा है। ज्ञात हो कि भारतीय रेलवे रोजाना 13,523 रेलगाड़ियों का परिचालन करता है, लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते सभी यात्री सेवाएं 14 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं। अब लॉकडाउन खत्म होने के बाद की तैयारियों में रेलवे जुट गया है।   
सूत्रों ने बताया खाली डिब्बों और केबिन को कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आईसीयू के तौर पर इस्तेमाल करने के प्रस्ताव पर रेलमंत्री की रेलवे बोर्ड अध्यक्ष वीके यादव, सभी जोन के महा प्रबंधक और डिविजन रेलवे के प्रबंधकों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में चर्चा की गई।
उन्होंने बताया कि बैठक में शौचालययुक्त डिब्बों को पृथक वार्ड के तौर पर इस्तेमाल के प्रस्ताव के साथ इस बात पर चर्चा की गई कि कैसे रेलवे की उत्पादन इकाइयों का उपयोग कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जरूरी वस्तुओं जैसे जीवन रक्षक प्रणाली, बिस्तर, ट्रॉली आदि के निर्माण में किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि यह विचार मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा यह कहे जाने के बाद आया कि वे कोरोना वायरस के चलते चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए नवोन्मेषी उपायों पर काम करें।
उन्होंने बताया कि इन डिब्बों और केबिन का इस्तेमाल चलते फिरते अस्पताल के रूप में किया जा सकता है, जिसमें परामर्श कक्ष, मेडिकल स्टोर, गहन चिकित्सा कक्ष और रसोईयान (पैंट्री) की सुविधा होगी। सूत्रों ने बताया कि रेलवे का देशभर में विस्तृत नेटवर्क है और रेलगाड़ी में स्थापित अस्पताल उन इलाकों में स्थापित किया जा सकता है, जहां संक्रमितों की संख्या अधिक हो और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं हो। 
उन्होंने बताया रेल डिब्बा उत्पादन इकाइयां चिकित्सा सुविधा के अनुकूलडिब्बों में बदलाव कर उत्पादन शुरू कर सकती है। सूत्रों ने बताया कि रेलवे के पास दुर्घटना राहत चिकित्सा उपकरण यान (एआरएमई) या रेल एंबुलेंस है जिसे कोरोना वायरस के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एआरएमई का इस्तेमाल सामान्यत: रेल दुर्घटना के दौरान घायल यात्रियों के इलाज के लिए किया जाता है।