लाकडाउन तक विदेशियों की मौजूदगी को लेकर अधंरे में रहा जिला प्रशासन


मथुरा। कान्हा की नगरी में पूरे देश के साथ 25 मार्च से लाकडाउन शुरू हुआ। इससे पहले भी कोरोना के कहर का अंदाजा लग चुका था। अधिकारी करीब एक पखवाडे से तैयारियों मंें जुट गये थे। एक सप्ताह तो पूरी तरह कोरोना के शोर के आगोश में बीता था। हर एक व्यक्ति पर नजर रखी जा रही थी। कौन कहां से आया, इस बात की टोह ली जा रही थी लेकिन लाकडाउन के साथ ही प्रशासन की लापरवाही सामने आई। 25 मार्च से लाकडाउन हुआ। इससे ठीक एक दिन पहले 24 मार्च को जनपद मथुरा वृंदावन में रह रहे 777 विदेशियों की कोई जानकारी प्रशासन के पास नहीं थी। दबाव बढा तो ये लोग मेडिकल जांच के लिए निकले। लाकडाउन के बाद इन्हें डर सताने लगा था, धीरे धीरे देर सवेर इनका पता चलना ही था, ऐसे में कडी कानूनी कार्यवाही में फंस सकते थे। ये विदेशी यहां करीब तीन महीने से रह रहे थे।
शहर के होटल गेस्टहाउसों पर प्रशासन ने विदेशियों को न ठहराने का दवाब बनाया। प्रशासन के दबाव में आए होटल, गेस्टहाउस संचालकों ने विदेशियों को अपने यहां ठहराने में असमर्थता जताए जाने के बाद एकसाथ करीब 85 विदेशी सैलानी अपनी जांच करवाने के लिए जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। इनमें से एक महिला सैलानी को फीवर होने पर उसका ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा है। जबकि जनपद में पिछले तीन महीने में आए 777 विदेशी सैलानियों के बारे में प्रशासन को जानकारी मिली है। जिला संयुक्त चिकित्सालय में मंगलवार की दोपहर करीब 15 विदेशी सैलानी जो कि होटलों में ठहरे थे चिकित्सकीय परीक्षण करवाने पहुंचे। अमेरिका, हॉलैंड, न्यूजीलैंड, रूस के निवासी ये सैलानी जब अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन से चिकित्सकीय जांच के बाद प्रमाणपत्र मांग रहे थे। चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. केके गुप्ता ने इन्हें प्रमाणपत्र के लिए मथुरा सीएमओ कार्यालय भेज दिया। इसके कुछ देर बार रूस निवासी 70 विदेशी सैलानी एक बार फिर जिला संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। जो कि रमणरेती क्षेत्र के रसियन अपार्टमेंट में रह रहे थे। इन सैलानियों की स्कैङ्क्षनग चिकित्सकों ने की तो रूस निवासी 35 वर्षीय जेम्फिरा को स्कैङ्क्षनग के दौरान फीवर पाए जाने पर तत्काल आइसोलेट कर दिया। इस महिला का थर्मामीटर से फीवर जांचा तो सामान्य था। बावजूद इसके महिला का ब्लड सैंपल जांच के लिए अलीगढ़ भेजा है।