जीएसटी घोटाला: इस फर्म से काटे गये 250 करोड़ के ई-वे बिल

-मोमबत्ती कारीगर ने रिश्तेदार व आॅफिस के कर्मचारियों के नाम से बना रखी हैं बॉगस फर्म
-रावतपाड़ा के बड़े-बड़े उद्योगपति मो...। से बनवाते हैं प्रतिदिन करोड़ों रुपये के बिल

एम डी खान
 
आगरा। गली-कूंचों से निकलकर पॉश कॉलोनी में पहुंचे मोमबत्ती कारीगर के संपर्क में रावतपाड़ा के बड़े उद्योगपति हैं। वह प्रतिदिन मो...। से करोड़ों रुपये के बिल-पर्चे बना रहे हैं। रावतपाड़ा के एक केमीकल करोबारी का तो यह हाल है कि वह खुद तो ई-वे बिल लेता ही है, दूसरों को भी कमीशन पर बिल बनावाकर देता है। मोमबत्ती नई फर्म से छह से सात माह बिल बनाने के बाद छोड़ देता है, लेकिन फर्म को खातों में चलाता रहता है। इस तरह की उसने दर्जनों बॉगस फर्म बना रखीं हैं। शुक्रवार को  ‘दैनिक अग्र भारत’ में खबर छपने के बाद पूरा गैंग अंडरग्राउंड हो गया है। सभी के मोबाइल नंबर बंद जा रहे हैं। रावतपाड़ा के जो व्यापारी उसके संपर्क में हैं, वह परेशान हैं कि वह किसी बवाल में न फंस जायें।

मोमबत्ती को सलाम ठोंकते हैं धन्नासेठ
कमला नगर के कर्मयोगी एंकलेव निवासी मोे...। उर्फ मोमबत्ती पीपलमंडी नाला से निकलकर कुछ ही साल पहले कमला नगर में पहुंचा है। वह पिता के साथ रावतपाड़ा में मोमबत्ती बनाने का काम करता था, जो आज भी चल रहा है। इसी वजह से उसके संपर्क में रहने वाले लोग उसके पीछे उसे असली नाम से न बुलाकर मोमबत्ती कहकर संबोधित करते हैं, हालांकि उसके समक्ष इस नाम का इस्तेमाल उसके पुराने साथी ही कर पाते हैं। वह आज इस बाजार का बेताज बादशाह है। वह किसी भी शादी समारोह में जाये तो समाज के उम्र दराज लोग उसकी अगवानी में लग जाते हैं। सदर क्षेत्र में हुए एक शादी समारोह में मोमबत्ती अपनी सफेद रंग की फॉर्चूनर से पहुंचा था। उसके वहां पहुंचते ही सजातीय उम्रदराज लोग जी-हजूरी में जुट गये। वह पूरी पार्टी में जितने भी समय रुका, वह सबके लिए विशेष मुख्य के ंद्र बिंदु रहा। पार्टी में पहुंचे एक पुलिस अधिकारी सोचने को मजबूर हो गये कि आखिर यह है कौन, जो इतनी तवज्जो मिल रही है, जबकि उम्र में सभी से छोटा है।

मो...। सरकार को लगा रहा चूना
शातिर के द्वारा काटे गये ईवे-बिल चेक करने पर पता चला कि रावतपाड़ा के नामचीन व्यापारी उसके संपर्क में हैं। मोमबत्ती उन्हे बिल काटकर देता है। रि.. -सिद्धी फर्म, माध...।, एमएस...। आदि फर्म के जरिये रोजाना करोड़ों रुपये के बिल काटे जा रहे हैं। मोमबत्ती रि..-सिद्धी फर्म पर करीब 250 करोड़ रुपये के बिल काट चुका है। फर्म पर जैसे ही विभाग से नोटिस आने लगते हैं, वह बिल काटना बंद कर देता है। वह फर्म का करीब छह से सात माह तक ही इस्तेमाल करता है। उसके बाद खातों में जिंदा रखता है। इससे कि विभाग को शक न हो। कई बैंक मैनेजर तक उससे मिले हुए हैं।  जीएसटी विभाग में भी अधिकारियों से अच्छी पेंठ बना रखी है। वह एक अधिकारी को लाखों रुपये महीनादारी पहुंचाता है। रावतपाड़ा के अलावा संजय प्लेस में भी आॅफिस बना रखा है। उसके यहां जो भी कर्मचारी काम करता है। उसके दस्तावेज लेता है और फर्म बना देता है। मोमबत्ती के नाम से भी रि...-सिद्धी फर्म दर्ज है। विभाग चाहे तो उसकी जांच करले दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।

...केमीकल कारोबारियों के ईवे-बिल की हो जांच
रावतपाड़ा पर केमीकल कारोेबारियों व कुछ किरानों वालों के बिल पर्चों की जांच हो जाये तो जीएसटी की बहुत बड़ी चोरी का खुलासा हो सकता है। एक केमीकल करोबारी प्रतिदिन करोड़ों रुपये के बिल बनवाता है। तिवारी गली का बॉ...। दूध, पनीर, खोआ का बिल बनवाता है। रावतपाड़ा का ही छो..। किराने का मोमबत्ती से ही बिल तैयार कराता है। इनके अलावा और भी दर्जनों व्यापारी हैं, जो मोमबत्ती के साथ मिलकर सरकार को चूना लगा रहे हैं। कारोबार छोटा हो या बड़ा सभी को जीएसटी नंबर लेने का नियम है। वह जो भी सामान बेचेंगे, उनका उसे लेखा-जोखा रखना पड़ेगा। जीएसटी हर सामान पर अलग-अलग टैक्स के रूप में है।

बिलों पर है जीएसटी के नियमों की अनदेखी
एक्सपर्ट के मुताबिक कबाड़ पर जीएसटी 18 प्रतिशत है। कोई व्यक्ति कबाड़ का काम करता है, तो उसे फर्म बनाकर जीएसटी नंबर लेना होगा। बतौर उदाहरण महीने में उसका टर्नओवर दस करोड़ का है, तो जीएसटी उसे 18 प्रतिशत के हिसाब से देनी होगी, मतलब 18 करोड़ रुपये उसे सरकार को देने हैं। वह टैक्स बचाने के लिए अपनी फर्म से एक नंबर में एक करोड़ महीने का टर्न ओवर दिखाता रहता है। उसके मुताबिक जीएसटी भर देता है, लेकिन नो करोड़ रुपये वह मोमबत्ती जैसे शातिर लोगों से बिल लेता है। माल की खरीद-फरोख्त वह खुद करता है। जिसके एवज में मोमबत्ती व्यापारी से साढ़े तीन प्रतिशत लेता है। व्यापारी को साढ़े तीन प्रतिशत देकर14.50 प्रतिशत टैक्स बचा लेता है। मोमबत्ती की जिम्मेदारी रहती है कि उसका बिल पोर्टल पर शो करेगा।

जांच हुई तो फंसेंगे व्यापारी
मोमबत्ती इस बात की गारंटी लेता है, उसके बनाये बिल को कोई पकड़ नहीं सकता। इसकी मुख्य वजह विभाग में उसकी घुसपेंठ है। जीएसटी का नियम है कि बिल पर ए, बी, सी मतलब माल ए ने बी से खरीदा और बी, सी से खरीदकर लाया था। जबकि मोमबत्ती के बिल चेक करके देखे जाये तो जीएसटी के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिल वहीं से कटेंगे, जिस पर माल होगा, लेकिन मोमबत्ती की हिम्मत देखों कि आॅफिस बनाकर बिल काटे जा रहा है। कुछ माल तो ऐसे हैं, जो उसने अपनी आंखों से देखे भी नहीं होंगे उनके भी बिल दे देता है। खोआ के बिल पर मैजिक का नंबर है, तो कबाड़ के बिल पर भी उसी मैजिक का नंबर पड़ा है और सही मायने में तो यह है कि कोई मैजिक गाड़ी होती ही नहीं हैं, उसके यहां सबकुछ धोखा है।