अवैध वसूली: आगरा पुलिस की बेलगाम कथित एसओजी कर रही लूट

एसएसपी, एसपी सिटी की टीम के अलावा चौकी और थाने में भी चल रहीं एसओजी
शहीद नगर चौकी पुलिस ने गाड़ी में क्रिकैट मैच का सट्टा खेल रहे सटोरियों से की वसूली

एम डी खान

आगरा। जिले में पिछले माह से अपराध की बाढ़ आ गई है। अपराधी दिन-दहाड़े व्यापारियों को निशाना बना रहे हैं। रात में चोर घरों के ताले चटका रहे हैं, अधिकारी खुद को साबित करने के लिए दिन-रात एक किये हुए हैं, तो वहीं थानों में तैनात सिपाही उनके मंसूबों पर पानी फेरने रहे हैं। वह आज भी जुआरी, सटोरियों के घरों में झांक रहे हैं। उन्हे पकड़ रहे हैं, वसूली करके छोड़ रहे हैं, कुछ तो ऐसे हैं, जो गलत धंधों में लिप्त लोगों का अपहरण कर फिरौती वसूल कर रहे। सोमवार को शहीद नगर पुलिस ने चार सटोरी पकड़े और उन्हे सुविधा शुल्क लेकर छोड़ दिया। एत्माउद्दौला थाने में तैनात एक सिपाही ने सटोरिये को पकड़ा और रास्ते में ही वसूली करके छोड़ दिया। मंटोला में हुई लूट का मामला भी कुछ ऐसा ही है। सूत्र कहते हैं कि लूट लाखों की है अपराधी पीड़ित का करीबी है।

गौरतलब है कि एसओजी में शामिल होने के लिए सिपाही ऐड़ी-चोटी का जोर लगाते हैं। कप्तान की एसओजी मतलब एक सिपाही खुद को थानेदार के बराबर समझता है। थाने के इंस्पेक्टर भी उनको बहुत तबज्जो देते हैं। इसकी मुख्य वजह कि थाने में कोई अपराध हो तो खुलासे में मदद करते हैं और कोई गुडवर्क हो तो उनके थाने में दाखिल कर दें। इससे कप्तान की निगाह में इंस्पेक्टर तेज तर्रार बना रहे। एसओजी का सिपाही जिले के किसी भी कोने पर जाकर काम कर सकता है। सादे कपड़े और कमर में पिस्टल दबाकर ऐसे शो करते हैं कि सीधे पटियाला से एनएसजी के कमांडो बनकर निकले हों। एक-दो बड़े गुडवर्क और फिर पूरे जिले में होने वाली अनैतिक गतिविधियों से महीनादारी बंध जाती है। अधिकांश नये एसएसपी के आते ही पुरानी एसओजी भंग या फिर नये सिपाही भरती किये जाते हैं। जो पुराने हैं वह थाने या फिर लाइन में भेज दिये जाते हैं, एक कहावत है कि ‘मुंह पर खून लग’ जाये तो वह फिर घास नहीं खा सकता, कुछ ऐसा ही हाल एसओजी से निकले सिपाहियों का है। वह थाने में हो या फिर लाइन में उनका टारगेट वसूली ही रहती है।

वर्दी पहनने में आती है शर्म
दस हजार के जूते, चार हजार का जींस, पांच हजार का चश्मा और गले में सोने की चेन पहनने वाले सिपाहियों को एसओजी से निकलने के बाद दो हजार की वर्दी पहनने में शर्म आती है। वह यह भूल जाते हैं कि उनके पास जो कुछ भी भौकाल है वह सब वर्दी की वजह से ही है। जिले में ऐसे सिपाही भी हैं, जो वर्ष 2000 से पहले के तैनात हैं। उन्हे कभी वर्दी पहनते नहीं देखा। पिछली सरकार में वह कप्तान को जेब में लेकर घूमते थे इस बार उनकी दाल नहीं गली तो चौकियों पर सम्मन तामील कर रहे हैं। उन्हे वर्दी पहनने तक की तमीज नहीं हैं। उनके साथ खड़े होमगार्ड की वर्दी सही होती है।

कारखास घुसे थे टीम में
एसएसपी बबलू कुमार ने आते ही थानों में तैनात कारखासों को लाइन हाजिर किया था। आरोप लगे थे कि कारखास थाना क्षेत्र में होने वाली अनैतिक गतिविधियों में लिप्त हैं। थाना सिकंदरा सहित एमएमगेट थाने की वसूली लिस्ट वायरल हुई थी। लिस्ट में सटोरी, होटल, शराब ठेकों से कितने पैसे आने हैं, उसमें सब लेखा-जोखा लिखा हुआ था। थानों से निकाले कारखास कुछ दिन तक तो लाइन में रहे, लेकिन बाद में वह एप्रोच कर एसपी सिटी की टीम में शामिल हो गये। एत्माउद्दौला थाने में तैनात रहे कारखास ने केंद्र के एक मंत्री से सिफारिश लगवाई थी।  उन्होंने जुआरी, सटोरियों से जमकर लूट मचाई। सिपाही से दरोगा बना एक पुलिसकर्मी क्रिकेट मैच के बुकियों से करोड़ रुपये वसूल कर ले गया है।

...गंभीरता से नहीं लेते अधिकारी
पुलिस अधिकारी टीम में शामिल सिपाहियों पर आंख बंद करके भरोसा कर लेते हैं। उनके द्वारा शहर में क्या हो रहा है, इसकी कोई व्यक्ति गोपनीय सूचना दे, तो अधिकारी अमल में नहीं लाते। यही वजह है कि पब्लिक अधिकारियों को कोई सूचना देने से बचती है। पुलिस की मुखबिरी करने वाले उनकी आड़ में अवैध धंधे करते हैं। शाहगंज में सिपाही के भाई से हुई घटना इस बात का साक्ष्य है कि मुखबिर पुलिस की सह पर गलत काम कर देते हैं। रिटायर अधिकारी ने बताया कि सर्विलांश से पहले पुलिस सब्जी की फेरी, पान खोखे वाला, चाय वाला आदि लोगों को अपना मुखबिर रखती थी। उनसे ही सूचनाएं ली जाती थी, लेकिन अब पुलिस सबसे पहले पुराने जुआरी, सटोरियों और चोरों को तलाशती है जो काम छोड़ चुके होते हैं या फिर कभी-कभार कर लेते हैं।

चौकी से छोड़ दिये बुकी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक सदर थाना क्षेत्र के शहीद नगर इंद्रपुरम पानी की टंकी के पास से डिजायर गाड़ी में बैठे चार लोगों को पुलिस ने पकड़ा। पुलिस को सूचना मिली कि गाड़ी में बैठकर लेपटॉप पर क्रिकेट मैच का सट्टा खेला जा रहा है। पकड़े गये सटोरी मनीष, ब्रजेश, मुकुल (डिश वाला) और अन्य था। सभी को चौकी लेकर जाया गया। सूचना देने वाला युवक चोरी में जेल जा चुका है। वह आज भी चोरी की वारदातों में संलिप्त रहता है। 12 बजे पकड़े गये बुकी दोपहर दो बजे घर आ गये। इस मामले की जानकारी शहर के एक अधिकारी को दी गई। उसके बाद भी सटोरिये रुपये लेकर छोड़ दिये गये। मनीष और ब्रजेश पूर्व में सट्टा और जुआ के मामले में जेल जा चुके हैं। मनीष की तो दबिश के दौरान छत से कूदने पर पैर तक टूट चुका है।