लॉ स्टूडेंट ने अपने चाचा को सुलाया मौत की नींद, वजह जानकार चौंक जाएंगे आप

13 साल पहले आरोपी के पिता का जंगले पर लटका हुआ मिला था शव


आगरा। बाप बड़ा न भइया, सबसे बड़ा रुपइया, जी हां सेल्समैन हत्याकांड में यह कहावत सच साबित हो रही है। इससे पूर्व में भी इसी परिवार में दो मौते हो चुकी हैं। जिन्हे परिजनों में आत्महत्या करार देकर पल्ला झाड़ लिया। सेल्समैन की मौत का भी कुछ ऐसा ही ह्श्र होेता, अगर पुलिस मामले को हल्के में लेती तो। थाना पुलिस और एसपी सिटी की टीम ने खुलासे के लिए बाल में से खाल निकालने का काम किया। कई दिन चली पूछताछ के आगे आरोपी की हिम्मत जबाव दे गई और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। हालांकि आरोपी ने सीआईडी सीरीयल देखने के बाद ही हत्या करने का प्लानिंग बनाई थी। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। मुख्य आरोपी सगा भतीजा है। हत्या करने में अपने दोस्त की मदद ले, जिसे लाख रुपये देने का वादा किया था। दोनों आरोपी उज्जवल भविष्य के लिए तैयारी में लगे थे, लेकिन अब दोनों जिंदगी सलाखों के पीछे कटेगी।

एसपी सिटी बौत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि थाना शाहगंज के पथौली निवासी सुधाकर शर्मा (35 साल) पुत्र स्व. सत्यप्रकाश शर्मा 28 जनवरी की शाम से लापता हो गया। 30 जनवरी को सुधाकर की भाभी विमलेश पत्नी स्व. दिवाकर शर्मा ने उसके लापता होने की गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। परिजनों की तरफ से भी कोई रुचि नहीं ली गई। 23 फरवरी को गांव के पास ही विवादित जमीन पर बने कुं ए में सुधाकर का शव मिल गया। पोस्टमार्टम में साफ हो गया कि गला दबाकर हत्या की गई थी। उसके बाद शव को कुंए में फेंका है। पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्जकर विवेचना शुरू कर दी। सर्विलांश का भी सहारा लिया गया। गांव वालों के मुताबिक सुधाकर शर्मा सेल्समैन था। वह लोन आदि कराने का काम भी करता था। घर में भाभी और दो भतीजे के अलावा कोई नहीं था। भाई की मौत के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी सुधाकर के ऊपर ही थी। वह अपने भाई से महज तीन साल ही छोटा था। दोनों बच्चों को सुधाकर ने ही पाला। गांव में जमीन भी है, जो हाल में बेशकीमती है।

दो मौत का नहीं हुआ था खुलासा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक 13 साल पहले सुधाकर के भाई दिवाकर का शव कमरे के जंगले पर चुन्नी से बने फंदे पर लटका मिला था। जो जमीन से महज चार फुट उंचा था। उसकी मौत को आत्महत्या माना गया और पुलिस ने भी अपनी जान छुड़ा ली। उसकी मौत की वजह जानने का प्रयास नहीं हुआ। उस दौरान दोनों बच्चे छोटे थे। वहीं भाई की मौत से पहले पिता सत्यप्रकाश की भी सिर में गोली लगने से मौत हुई थी। हालांकि कुछ लोग सिर में लोहे की सरिया लगने से मौत की वजह बता रहे हैं। सत्यप्रक ाश की मौत को भी आत्महत्या करार दिया गया और पुलिस ने मामला प्रॉपर्टी का विवाद बताकर बंद कर दिया।

भविष्य बचाने के चक्कर में भविष्य हो गया खराब
आरोपी निखिल शर्मा बीए एलएलबी प्रथम वर्ष का छात्र है। उसे पता चला कि चाचा सुधाकर शर्मा अपनी शादी करना चाहता है। इसके लिए पचास हजार रुपये में बिहार से लड़की लाने वाला है। निखिल को लगा कि इससे समाज में परिवार की छवि खराब हो जायेगी और दोनों भाइयों की कोई शादी नहीं करेगा। इसके अलावा उसे कहीं न कहीं यह भी लगता था कि वह घर में चाचा कम पिता बनकर रहता है और अब वह शादी करना चाहता है। जो महिला आयेगी वह प्रॉपटी में हिस्सेदार बनेगी। यह बात उसे नागवार गुजर रही थी। उसने चाचा को ऐसा करने से रोकने के लिए हत्या की योजना बना डाली। इस काम में उसने अपने गांव के ही मित्र जीतू पुत्र राकेश शर्मा को साथ लिया। जीतू सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा है। जीतू को साथ देने के एवज में एक लाख रुपये देने का वादा किया था।

डर के मारे आरोपी की निकल गई थी ट्टटी
पुलिस सूत्रों के अनुसार 28 जनवरी की शाम को निखिल मृतक सुधाकर को टहलने के लिए साथ ले गया था। रेलवे लाइन पर जाकर निखिल ने गमछा से गला घोंट दिया। उसके दोस्त जीतू ने मृतक के हाथ पकड़ लिये। सुधाकर की मौत हो गई। पांच मिनट में ही निखिल इतना डर गया कि उसकी कपड़ों में ही लेटरिंग निकल गई। जीतू के हिम्मत देने के बाद दोनों ने हाथ पैर पकड़े और पास ही सूखे कुंए में शव को फेंक दिया। मृतक का मोबाइल घटना स्थल पर ही बंद कर दिया था। वह घर तक ट्टटी में खराब कपड़ों सहित आया। पुलिस ने वह कपड़े घर में बरामद कर लिये हैं। आरोपी मृतक का मोबाइल साथ ले आया था। उसे लगा कि मोबाइल से पुलिस पता कर लेगी। एक फरवरी को वह मोबाइल चालू करके कुंए में फेंककर आया था। पुलिस को सर्विलांश के जरिये इसका भी सुराग लगा था कि मोबाइल बंद हुआ और फिर खुला कैसे। आरोपी निखिल प्रतिदिन कुंए में नजर रखता था। उसे लगता था कि कुंआ गहरा है। इसकी किसी को भनक नहीं लगेगी, लेकिन बॉडी पुरानी हुई तो उससे में से बदबू आने लगी।

शिनाख्त करने में दिखाई फुर्ती
कुंआ के आसपास खाली जमीन पड़ी हुई है। वहां बच्चे क्रिकेट खेलते हैं। कुंए से बदबू देख उन्हे शक हुआ कि इसमें कुछ तो है। गांव से सुधाकर शर्मा भी लापता चल रहा था। यह सोच ग्रामीणों ने डायल112 पर कॉल कर दिया। कुं आ करीब 60 से 70 फुट गहरा है। बॉडी कुंए में चालीस फुट नीचे थी। उसमें अंधेरा था। 25 दिन पुरानी बॉडी होने की वजह से वह पूरी तरह सड़ चुकी थी। इन सबके बावजूद भी निखिल ने बॉडी ऊपर आने से पहले शिनाख्त कर दी कि यह तो मेरे चाचा हैं। इस बात को पुलिस ने पूछताछ में गंभीरता से लिया। सुधाकर का पर्स और बाइक घर में ही मिले, जबकि वह घर से बाहर कहीं भी जाता तो बाइक साथ होती। पर्स तो छोड़ने का मतलब ही नहीं बनता। इस वजह से पुलिस को शुरू से ही हत्यारोपी घर में ही दिखाई दे रहा था।

खुलासे में यह रहे शामिल
एसपी सिटी ने बताया कि पूरे खुलासे में इंस्पेक्टर शाहगंज सलीम अहमद, एसआई सोनू शर्मा, योगेन्द्र कुमार, दयानंद शर्मा, हेडकास्टेबल दिनेश कुमार, महेश चंद्र, सोनेश, अरुण और श्रृषि कुमार रहे।