सिपाही के चचेरे भाई से चलती कार में तीन लोगों ने किया दुर्ष्कम

-पीड़ित परिवार ने खुद दोषियों को तलाशकर पुलिस को दी सूचना
-आईजी ए सतीश गणेश और एसएसपी मामले की करा रहे हैं जांच


आगरा। आईजी ऑफिस में तैनात सिपाही को थाना पुलिस ने टरका दिया, खुद का परचिय दिया तो इंस्पेक्टर ने उसे बुरी तरह हड़का दिया, यही नहीं अपने अधिकारी को नजरअंदाज कर यहां तक कह दिया कि आईजी का मुंशी ही तो है आईजी तो नहीं। मामले की जांच एसएसपी ने सीओ लोहामंडी से कराई है, वहीं आईजी ने भी अपनी तरफ से एसपी सिटी को जांच करने के आदेश दिये हैं। पूरे मामले में इंस्पेक्टर आज भी गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाये हुए हैं। वह पूछने पर यह कहते हैं कि शराब के ठेके पर मारपीट हुई थी, मामले की जांच चौकी इंचार्ज ने की और रिपोर्ट दर्ज हुई। अब वह दुष्कर्म की भी कहानी गढ़ रहा है। पुन: मेडीकल कराकर दूध का दूध पानी का पानी कर दिया जायेगा। जबकि पीड़ित सात दिन से इसी इंतजार में है, कि उसका मेडीकल करा लिया जाये। यही वजह है कि वह घटना के बाद से अभी तक नहाया नहीं है।

19 फरवरी की है वारदात
थाना शाहगंज के बीके पुरम निवासी श्याम (35 साल) काल्पनिक नाम पायल का कारीगर है। वह शादी-शुदा है। एक मूक-बधिर बेटी भी है। परिजनों के मुताबिक 19 फरवरी की शाम साढ़े सात बजे बाइक लेकर दूध लेने गया था। काफी देर तक नहीं लौटा तो उसके मोबाइल पर कॉल किया। श्याम का मोबाइल घर पर ही रखा था। उसकी तलाश में परिजन बाहर गये तो मोटर साइकिल खड़ी मिल गई। काफी देर तलाश के बाद रात दस बजे करीब वह शंकरगढ़ की पुलिया के पास बेहोश की हालत में मिला। श्याम के मुंह से खून निकल रहा था। होठ सूजे हुए थे, जिसकी वजह से वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। उन्हे लगा कि कोई एक्सीडेंट या फिर गिर गया है। परिवार में अधिकांश लोग मेडीकल क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। श्याम की घर पर ही दवा-दारू कर दी। दूसरे दिन उसे आराम मिला, तो उसने बताया कि उसे सफेद रंग की इंडिगो कार सवार तीन लड़कों ने मारापीटा और मोबाइल, पैसे लूट ले गये।

दूसरे दिन सुबह पीड़ित को ले गये थाने
पीड़ित का भाई सुधीर और चचेरा भाई मनोज सक्सेना(जो कि आईजी ऑफिस में मुंशी है) उसे लेकर थाने गये। थाने से मेडीकल कराने के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। वहां डॉक्टर ने महज एक्सरा करके वापस कर दिया। थाने पर चौकी इंचार्ज उदयवीर सिंह मिले। उन्होंने कहा कि तहरीर में से लूट अपहरण आदि की बात हटा दो मारपीट की दूसरी तहरीर दे दो। उनके पकड़ने जाने के बाद धारायें बढ़ा देंगे। इंस्पेक्टर अरविंद कुमार ने भी पीड़ित के सिपाही भाई मनोज से यही कहा। सिपाही मनोज उनकी बात मान गया। तहरीर लिखकर पुलिस भूल गई। पीड़ित ने कुछ कहा तो वीआईपी होने की बात कह दी।

इंडिगो कार खुद की तलाश
आईजी ऑफिस में तैनात सिपाही मनोज और उसके साथियों ने क्षेत्र में सफेद रंग की इंडिगो की सुरागरसी की। सूचना मिली कि हमीद नगर गड्डा, बालाजी पुरम क्षेत्र में कुछ युवक हैं, जो इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं। उनके पास भी इंडिगो गाड़ी है। सौरभ और बबलू नाम के दो युवकों को तलाशकर पुलिस को सूचना दे दी। चौकी इंचार्ज ने दोनों को पकड़ हवालात में डाल दिया। सिपाही मनोज सक्सेना ने इंस्पेक्टर को बताया कि साहब आप देख लो आपके कहने पर ही तहरीर बदल दी थी। भाई के साथ इन लोगों ने दुष्कर्म भी किया है। अब आप धारायें बढ़ा दो। पुलिस सूत्रों के मुताबिक सौरभ नाम के युवक ने पुलिस को बताया कि शराब के नशे में बबलू और एक अन्य ने श्याम के साथ गलत काम किया था। थाना पुलिस सब जानती थी, लेकिन आरोपियों को बचा गई। इतना बढ़ी घटना हो गई, दो आरोपी पकड़ लिये, लेकिन पुलिस को तीसरे का नाम अभी तक पता नहीं है।

इंस्पेक्टर ने पुराने संबंधों को भी किया दरकिनार
आईजी ऑफिस में तैनात मुंशी मनोज सक्सेना ने इंस्पेक्टर अरविंद कुमार से खुद के पुलिसकर्मी होने का हवाला दिया। यह भी कहा कि वह आईजी ऑफिस में है। इंस्पेक्टर ने बुरी तरह हड़का दिया और कहा कि आईजी का मुंशी है आईजी तो नहीं है। सिपाही ने इसके अलावा यह भी बताया कि साहब वह कानपुर में आपके साथ थाने में तैनात रह चुका है। उसके बाद भी इंस्पेक्टर ने यह कहकर थाने से भगा दिया कि मर्डर नहीं हुआ है, जो फांसी चढ़ा दूं। सूत्रों के अनुसार इंस्पेक्टर को तो आईजी शब्द सुनते ही मुंशी की बढ़ चढ़कर मदद करनी चाहिए, क्योंकि जनाव झांसी में आईजी के इंस्पेक्टर रह चुके हैं। थाने में पोस्टिंग आईजी की कृपा बताई जा रही है।

संगीन धाराओं को दबा दर्ज की एनसीआर
पहली तहरीर में दुष्कर्म की बात नहीं थी। आईजी को दी गई शिकायत में हूबहू वही शब्द हैं। उस तहरीर के मुताबिक धारा 308, 342, 364, 325, 392 में कार्रवाई होनी चाहिए थी। दुष्कर्म का मामला सामने आने पर धारा 377 बढ़ती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ पुलिस ने आरोपियों को बचाने और थाने में अपराध दर कम करने के चक्कर में महज एनसीआर अपराध संख्या 048/2020 धारा 323, 504, 506 दर्ज की। बताया जाता है कि आरोपी अपराधी किश्म के हैं। वह थाना पुलिस के कई सिपाहियों के संपर्क में हैं। मामले में समझौता करने के लिए मुंशी मनोज पर कई पुलिसकर्मियों के कॉल आये।

शर्म की वजह से छिपाई दुष्कर्म की जानकारी
पीड़ित के परिजनों ने कहा कि श्याम ने दुष्कर्म की दो दिन तक बात छिपाये रखी। कोई मर्द खुद के साथ इस तरह की घटना समाज में नहीं लाना चाहता। शर्म की वजह से पत्नी को भी नहीं बताया। तबीयत अधिक खराब हुई तब उसने पूरी जानकारी दी। परिवार की आरोपियों से कोई दुश्मनी नहीं हैं, जो उन्हे फर्जी फंसाते। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि शहर में पुरुष ही सुरक्षित नहीं हैं, तो महिलाओं क्या होगा। आरोपी चलती गाड़ी में युवक के साथ दुष्कर्म करते रहे, उसे गाड़ी में लेकर कई घंटे घूमते रहे। उससे तीन लाख रुपये घर से मंगाने के लिए मारापीटा।


गुडमार्निंग में मिली गालियां
यह मामला अखबार की सुर्खियां बना और पीड़ित आईजी से पहले सुबह-सुबह एसएसपी से मिला, तो एसएसपी ने इंस्पेक्टर को फोन कर जानकारी मांगी, इस पर इंस्पेक्टर ने एसएसपी को गुमराह करने का प्रयास किया। एसएसपी ने इंस्पेक्टर का जमकर राष्ट्रीय गालियों से स्वागत किया। पूरे मामले की जांच सीओ लोहामंडी को दी है। सूत्रों के मुताबिक एसएसपी ने इंस्पेक्टर से यह भी कहा कि आईजी महोदय ने साफ लिखा है कि जांच कोई भी करे, उसमें कमेंट एसएसपी खुद लिखकर दें।