ये है आगरा के भगवान टॉकीज चौराहा का काला सच

ठेकेदार बना डग्गेमार वाहनों का ‘भगवान’, पुलिस का रहता है संरक्षण

-चौराहे पर अवैध वसूली को ट्रैफिक पुलिस व ठेकेदार का बना गठजोड़
-मथुरा और दिल्ली तक ठेकेदार की सह पर दौड़ रही दर्जनों लग्जरी कार, बस

 

एमडी खान।
आगरा। दिल्ली जाना है तो अब खटारा रोडवेज का इंतजार करने की जरूरत नहीं हैं, आपके सफर को आरामदायक बनाने के लिए भगवान टॉकीज चौराहे के ठेकेदार ने लग्जरी गाड़ियों का इंतजाम किया हुआ है! हमारी लिखी इन लाइनों का शायद आप विश्वास न करें, तो चौराहे पर जाकर पूछताछ कर लें? वहां आपकों लग्जरी कारें व निजी बसें दिखाई दे जायेगीं, जो गैरकानूनी तरीके से दिल्ली तक दौड़ रही हैं, प्रति माह परिवहन विभाग को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। जिसका सीधा-सीधा जिम्मेदार ठेकेदार है, जो कार व बसों को चलवाने में मदद दे रहा है। ठेकेदार को राजनेताओं के अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस का दोनों हाथों से सहयोग है। नगर निगम से मिले इस द्वितीय श्रेणी के ठेका में भी जालसाजी हुई है। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक ठेका मिला था सात माह के लिए, लेकिन मिलीभगत से 12 माह में तब्दील करा दिया गया है।

पार्किंग स्थल छोड़, सड़क से भरते हैं सवारी
गौरतलब है कि रामबाग, वाटरवर्क्स की तरह भगवान टॉकीज चौराहा भी बहुत व्यस्तम चौराहों में गिना जाता है। हालांकि नगर निगम ने इसे द्वितीय श्रेणी में रखा है। इसी ठेके में ही सिकंदरा और बोदला प्वाइंट भी आते हैं। इस चौराहे पर ही शहर की लाइफ लाइन एमजी रोड समाप्त होती है। यहां से प्रतिदिन हजारों वाहन अपने गतंव्य को जाते हैं। फ्लाई ओवर के ऊपर से भारी वाहन गुजरते हैं। जिनसे ठेकेदार के गुर्गे वसूली करते देखे जा सकते हैं। इसके अलावा भी फ्लाई ओवर के दोनों तरफ अवैध बस अड्डे बने हुए हैं। जो कि पूरी तरह गैरकाननूी हैं। ठेकेदार यहां से अपनी वसूली करता है। फ्लाई ओवर के नीचे तत्कालीन टीआई तेजबहादुर सिंह की पहल पर सफाई कर पार्किंग स्थल जो बनाये गये थे, उन्हे नगर निगम ने अपने अंडर में ले लिया है। उनको पार्किंग स्थल बना दिया है। ठेके दार यहां से सवारियां न भरवाकर सड़क पर डग्गेमार वाहनों को खड़ा करता है। जिनकी वजह से चौराहे पर जाम का झाम बना रहता है।

डग्गामार बस से होती है इनकी लाखों की कमाई
भगवान चौराहा और आईएसबीटी से दिल्ली बार्डर, इटावा, मैनपुरी, एटा, कासगंज आदि जाने के लिए दर्जनों रोडवेज के भेष में डग्गामार बस चल रही हैं। बसों पर रोडवेज जैसा कलर, लिखने व नंबर प्लेट का तरीका सबकुछ रोडवेज जैसा ही है। यह सब गौर से दिखने पर ही पता चल सकता है कि यह बसें डग्गेमार हैं। यह बसें रोडवेज बस से कम किराया लेती हैं। ठेकेदार प्रति बस से हरेक चक्कर पर 700 रुपये वसूल करता है। इनके अलावा लग्जरी गाड़ियां भी डग्गेमारी कर रही हैं। वहां खड़े ठेकेदार के गुर्गे सवारियों को समझाते हैं कि खटारा रोडवेज से तो आप लग्जरी कार या फिर बस का मजा लीजिये, ये आपको कम समय और कम रुपये में सुविधा दे रहे हैं। बस करीब 20 से 25 हैं, तो जायलो, क्वालिस, ईको आदि दो दर्जन से अधिक हैं। ठेकेदार बस से 700 तो कार से 250 रुपये लिये जाते हैं। कार में 13 सवारी भरी जाती हैं।

अवैध कमाई में है ट्रैफिक की हिस्सेदारी
डग्गेमार बस से ठेकेदार 700 रुपये प्रति चक्कर ले रहा है, तो उसमें 250 रुपये ट्रैफिक पुलिस और थाना पुलिस के हैं। चौराहे पर खड़ा सिपाही और हेड रोजाना अपना मेहनताना लेता है। यह कहने में हमे कोई डर नहीं कि ट्रैफिक पुलिस सरकार की न बजाकर ठेकेदार के घर की पहरेदारी कर रही है। थाना पुलिस और चौकी को ठेकेदार महीनेदारी भेजता है। बस और कार के अलावा चौराहे पर लाल ऑटो जो एक दम शहर में नहीं चल सकते हैं, उनको भी चलवाने का ठेकेदार ने ठेका लिया हुआ है। लाल ऑटो से प्रति चक्कर 30 रुपये वसूले जाते हैं, जबकि हरे और सीएनजी लगे ऑटो नियमानुसार 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुकता करते हैं।