आखिर क्यों आगरा एसएसपी बबलू कुमार ने ट्रैफिक से एक साथ 70 पुलिसकर्मियों को किया है बाहर

ट्रैफिक इंस्पेक्टर्स की मेहरबानी से दौड़ रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली!
ठेकेदार प्रति ट्रैक्टर 1500 रुपये वसूलकर संबंधित टीआई को पहुंचाता है महीनादरी

आगरा। किसान का ट्रैक्टर जरूरी काम से शहर में आ जाये तो ट्रैफिककर्मी बवाल मचा देते हैं, उसे पकड़कर ऐसे डरायेंगे, धमकायेंगे कि मानो सीधा बार्डर पार करके आया हो, लाख मिन्नतों के बाद भी उस पर कार्रवाई तय है, अब भला वो जुर्माने के रूप में हो या फिर सीधे उसकी जेब में डाका डालकर हो। जबकि शहर में डेढ़ हजार से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉली चल रहे हैं। यमुनापार, आवास विकास, रोहता आदि क्षेत्र तो ट्रैक्टर्स के ठिकाने हैं। यहां दिन-रात ट्रैक्टर तेज रफ्तार में दौड़ते देखे जा सकते हैं। ट्रैफिक में तैनात अधिकारियों को यह नहीं दिखाई देते। इसके पीछे की सच्चाई जानने के लिए हम ट्रैक्टर मालिक बनकर आवास विकास क्षेत्र के एक ठेकेदार से मिले। उसने जो बताया उससे साफ था कि उस क्षेत्र में ट्रैफिक के संबंधित अधिकारी को डेढ़ हजार रुपये प्रति ट्रैक्टर महीनादारी पहुंचती है। पूर्व में यह काम टीआई का एक चालक करता था। हाल में यह व्यवस्था ठेकेदार संभाले हुए हैं।

एसएसपी ने की थी ट्रैफिक पर बड़ी कार्रवाई
गौरतलब है कि कमिश्नर के साफ आदेश है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली किसी भी कीमत पर शहर में नहीं चलेंगे। उसके बाद भी आलम यह है कि डेढ़ हजार से अधिक ट्रैक्टर शहर में कमर्शियल एक्टिविटी में लिप्त हैं। तत्कालीन एसएसपी के जाते ही एक बार फिर पूरा कॉकस सक्रिय हो गया है। हालांकि एसएसपी बबलू कुमार ने ट्रैफिक को अधिकारियों को आड़े हाथ लिया है।  ट्रैफिक के 70 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर अन्य को हिदायत दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार कार्रवाई की जद में आये ट्रैफिककर्मी अवैध गतिविधियों में लिप्त थे। उसके बाद भी ट्रैफिक विभाग पुराने ढर्रे पर चल रहा है। ट्रैफिक अधिकारियों को इस बारे में बताने पर वह दूध के धुले और इस तरह के काम न होने की दुहाई देते हैं। जबकि सुबह से देर रात तक पूरे शहर में ट्रैक्टर देखे जा सकते हैं। बिल्डिंग मैटेरियल मालिकों के पास सप्लाई देने का एक मात्र यह साधन है।


ट्रैक्टर से होता है मलवा डालने व उठाने काम
दैनिक अग्र भारत ने ट्रैक्टर मालिक बनकर ठेकेदार से मिले। उसने कहा कि एक नहीं दस ट्रैक्टर ले आओ सभी चल जायेंगे। बतादें कि पुराने मकान टूटते हैं। उसका मलवा (ईट-पत्थर) ट्रॉली में भर लाते हैं। मलवा उठाने के 500 रुपये मिलते हैं। वहीं नये निर्माण के लिए भराव की जरूरत होती है। वह मलवा उनको बेच देते हैं। वहां से भी मलवा डालने के रुपये मिल जाते हैं। इस तरीके से दिनभर में ट्रैक्टर मालिक चार से पांच चक्कर लगा देता है। इस बीच में जो भी चौकी पड़ेगी उनको रोजना ट्रैक्टर चालक खुद रुपये देता है। डायल 112 और थाने की मोबाइल भी 20 रुपये प्रति ट्रैक्टर हरेक चक्कर पर लेती हैं।

आवास विकास में दौड़ती है मौत
सेंट्रलपार्क के पास एक बड़ी जगह खाली पड़ी हुई है। यहां पर शहर का मलवा जमा किया जाता है। महिलाओं और बच्चों से ईट, पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ेकर उन्हे ट्रॉली के द्वारा सप्लाई करते हैं। यहां से प्रतिदिन 50 ट्रैक्टर चलते हैं। सेंट्रलपार्क में आने वाले लोग ट्रैक्टरों से भयभीत रहते हैं। पिछले तीन साल की बात करें तो तीन दर्जन से अधिक हादसे हो चुके हैं। इसमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। वही दो छात्र जीवनभर के लिए विकलांग हो चुके हैं। पूर्व में ट्रैक्टर चालक रह चुके व्यक्ति ने बताया कि रोहता नहर, फतेहाबाद रोड, टेड़ी बगिया, सिकंदरा, पश्चिमपुरी, अवधपुररी, शाहदरा, शहीदनगर आदि स्थानों पर ट्रैक्टर को ही कमर्शिलय यूज इस्तेमाल किया जा रहा है। चंबल, गिट्टी सीमेंट आदि ढोह जा रहे हैं।

थाना पुलिस मिली हुई है मूक सहमति
बतादें कि ट्रैफिक शहर में ड्यूटी के लिए आठ बजे के बाद सक्रिय होती है। उससे पहले शहर में सैकड़ों ट्रैक्टर अपनी गतिविधि करके निकल जाते हैं। राजस्थान धौलपुर से पत्थर गिट्टी भरकर लाने वाले ट्रैक्टर प्रतिदिन सुबह शहर के बीचों-बीच होकर गुजरते हैं। इस दौरान कागरौल, अकोला चौकी, मलपुरा थाना, धनौली चौकी, खेरियामोड़, रूई की मंडी होते हुए कोठी मीनाबाजार होकर शहर में घुस जाते हैं। प्रत्येक चौकी पर ट्रैक्टर चालक चढ़ावा देता हुए निकल जाता है।

कमर्शिलय यूज में चल रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली, डग्गेमार वाहन और ठेकेदार की शिकायतें मिली हैं। एसपी ट्रैफिक, नगर निगम व संभागीय अधिकारियों को लेकर संयुक्त अभियान चलवाया जायेगा।
                                                                                            बौत्रे रोहन प्रमोद 
                                                                           एसपी सिटी आगरा।