"यातायात अधिकारी बने धृतराष्ट"...टीआई की छूट पर डग्गेमार कर रहे लूट !

जीआईसी मैदान को बना रखा है जीप चालकों ने अवैध अड्डा
लोडिंग जीप व राजस्थान नंबर की डग्गेमार वाहन ढो रहे सवारियां

एम डी खान ​

आगरा। जिले में किसी भी अधिकारी की तैनाती हो, वह अपराध के बाद शहर में यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए बात जरूर करता है, हालांकि कुछ दिन बीत जाने के बाद उन्हे खुद के कह शब्द याद नहीं रहते, शहर में यातायात को संभालने के लिए एसपी ट्रैफिक, सीओ, तीन टीआई, तीन टीएसआई और अन्य ट्रैफिक पुलिसकर्मी लगे हुए हैं। जिनकी संख्या डेढ़ सौ से ऊपर है।

इन्हे सुबह से शाम तक दुपहिया और आॅटो चालक तो दिखाई देते हैं, लेकिन शहर में कई जगह चल रहे अवैध डग्गेमार वाहन नहीं दिखते, आज दैनिक अग्र भारत आपके सामने पचकुंइयां के पास जीआईसी मैदान से भरतपुर तक चल रहे अवैध डग्गेमार वाहनों के बारे में बतायेगा कि यहां किस तरीके से और किस तरह के वाहन दौड़ रहे हैं, जिन्हे ट्रैफिक में तैनात अधिकारी कैसे इंगोर कर अपनी जिम्मेदारियों से बच रहे हैं।

पुलिस लाइन से आठ सौ मीटर दूर है जीआईसी
कलक्ट्रेट से दो किमी और पुलिस व ट्रैफिक लाइन से आठ सौ मीटर दूर पचकुंइयांं के पास जीआईसी मैदान आजकल डग्गेमार वाहनों का अड्डा बना हुआ है। पुलिस लाइन से निकलने के बाद छोटे से बड़ा कोई भी अधिकारी यहां होकर जरूर निकलता है। यहां खड़े अवैध डग्गेमार वाहन सड़क पर खड़े होकर सवारियां भरते हैं, जो सौ फीसदी गैरकानूनी है। यहां कोई बस अड्डा नहीं हैं, नगर निगम द्वारा किसी भी प्रकार का ठेका नहीं उठाया गया है। उसके बाद भी यातायात अधिकारी देखकर भी अनदेखी कर रहे हैं। जीआईसी मैदान लोहामंडी थाना क्षेत्र में आता है। यहां से पुलिस बूथ महज पचास मीटर दूर है। यहां बैठी पुलिस के सामने डग्गेमार वाहन भरे जाते हैं, पता नहीं क्यों वहां बैठी पुलिस देखकर भी कोई कार्रवाई करने के बारे में सोचती भी नहीं हैं। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना था कि पुलिस को हर महीने लिफाफा पहुंच जाता है।

यूपी में दौड़ रही राजस्थान की कंडम जीप
ताजमहल को ध्यान में रखते हुए कोर्ट का आदेश है कि 15 साल से पुराना वाहन नहीं चलेगा। लोगों ने डर की वजह से दस साल तक के वाहन पहले ही औने-पौने दामों में दूसरे जिले में बेचना शुरू कर दिया है। जीआईसी मैदान पर आपकों वह जीप दिखाई दे जायेंगी जो कुछ सालों में विंटेज की श्रेणी में रखी जायेंगी। यहीं नहीं यूपी से किसी भी राज्य में जाने के लिए परमिट और ट्रैक्स अदा करना होता है, लेकिन जीआईसी मैदान से सवारियां भरकर राजस्थान नंबर की गाड़ियां धड़ल्ले से दौड़ रही हैं। यहां से प्रतिदिन 30 से 35 डग्गेमार जीप आगरा से भरतपुर तक चलती हैं। छतों के ऊपर भारी सामान रखकर पुलिस और संभागीय विभाग के अधिकारियों को चुनौती दे रहे हैं, लेकिन दोनों ही विभाग के अधिकारी यह खेल आंख बंद करके देख रहे हैं।

लोडिंग जीप में भरी जा रहीं सवारियां
रविवार को अवैध अड्डे पर जाकर देखा तो वहां यूपी 24 सी 8674 नंबर की जीप में ठूंस-ठूंसकर सवारियां भरी जा रही थीं। यह वह जीप हैं जिसे पुलिस ने भी अपने विभाग से निकाल दिया है। उसमें बैठी सवारी से बात करने पर पता चला कि जीप किरावली, फतेहपुरसीकरी होते हुए भरतपुर पहुंचती है। प्रति सवारी भरतपुर के लिए पचास रुपये लिये जाते हैं। सफेद रंग की आरजे 05 यूए 4603 अपने नंबर के इंतजार में खड़ी हुई थी। आरजे मतलब राजस्थान नंबर की गाड़ी यूपी के आगरा में सवारियां ढोने का काम कर रही है। तीसरी गाड़ी आरजे 21 यूए 7419 जिसके शीशे पर नागौर आॅटो मोबाइल लिखा हुआ था। जीआईसी मैदान से थोड़ी दूरी पर तीन डग्गेमार बोलेरो भी खड़ी हुई थीं। जिन्हे जुगाड़ करके मोडीफाई किया हुआ है। इस गाड़ी में सवारियां अन्य की अपेक्षा अधिक बैठ सकती हैं। जिसमें एक नंबर यूपी 83 एटी 7440 था।

हिम्मत है तो इन पर करो कार्रवाई
अपराध को रोकने के लिए थाना पुलिस होती है। यातायात में अवैध तरीके से चल रहे वाहनों को रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है। शहर में एसपी ट्रैफिक, सीओ, तीन टीआई हैं। जिनकी जबावदेही तय की गई है। कुछ साल पहले तक जिले में एक ही टीआई (ट्रैफिक इंस्पेक्टर) की तैनाती होती थी, लेकिन फिलहाल यहां तीन टीआई की तैनाती है। इनके अतिरिक्त तीन टीएसआई भी हैं, जो पूर्व में 10 से अधिक होते थे। शहर को तीन टीआई में बांट दिया गया है। नवांगत टीआई मनमानी पर तुले हुए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अचल शर्मा ने कहा कि सुबह घर से निकलने वाले बाइक सवार को ऐसे घेरकर रुकवाते हैं, मानों को अपराधी जा रहा हो। क्या इन टीआई को जीआईसी से चल रही डग्गेमार जीप दिखाई नहीं दे रही हैं।

जिम्मेदारियों से बच रहे अधिकारी
सीओ ट्रैफिक से इस संबंध में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि कुछ दिनों पहले वहां एसपी ट्रैफिक ने कार्रवाई की थी। शहर को टीआई में किस तरह बांटा है, इस पर वह कुछ बता नहीं पाये। टीआई विजय कुमार के अतिरिक्त दो का उन्हे नाम भी नहीं पता था। सीयूजी नंबर 9454402410 जो कि पूर्व में प्रथम ट्रैफिक इंस्पेक्टर पर ही रहता था। इस नंबर पर बात की गई तो इन्होंने खुद को हाल ही में तैनाती का हवाला दिया। हालांकि उन्होंने अपनी ड्यूटी दूसरे क्षेत्र में होने की बात कही। पड़ताल में सामने आया कि इस क्षेत्र का टीआई मय फोर्स के प्रतिदिन फतेहपुरसीकरी रोड पर खड़े होते हैं। इसके बावजूद भी डग्गेमार जीप कैसे निकल जाती हैं, यह सवाल ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।


पूर्व में एक-दो बार फतेहपुरसीकरी रोड पर डग्गेमार वाहनों पर कार्रवाई की गई है। जीआईसी मैदान पर कोई ठेका नहीं हैं। वहां से सवारियां भर रहे वाहनों पर कार्रवाई की जायेगी।
                                      प्रशांत प्रसाद कुमार
                                     एसपी ट्रैफिक आगरा।