आगरा का ये सट्टेबाज करता है रोजाना चार करोड़ रुपये सोने की है तस्करी

-चांदी कारोबारी सु..... का सोने की ब्रेड और रॉथेनियम से है रिश्ता
-इंदौर, कटक, जयपुर से आता है बॉल्वो बस से सट्टेबाज कारोबारी का प्रतिदिन 20 किग्रा सोना
-सट्टेबाज चांदी कारोबारी और उसके दोस्त की जिले व अन्य शहरों में है लोकल ब्रेड की सप्लाई

एमडी खान


आगरा। आपके नाक, कान, गले और हाथों में चमक रहे सोने के आभूषणों को अगर सर्राफा बाजार या फिर जिले के सर्राफाओं से खरीदा है, तो आप कहीं न कहीं ठगी का शिकार हो चुके हो, जी हां हम एक दम सही और सौ टके की बात कह रहे हैं। पुलिस कार्रवाई से बचा सट्टेबाज चांदी कारोबारी फिलहाल सोने-चांदी की तस्करी कर रहा है। वह प्रतिदिन दस किग्रा सोना दूसरे शहरों से दो नंबर में खरीदता है और उसमें रॉथेनियम पाउडर की मिलावट कर बड़े दुकानदारों को बेच रहा है। उसके इस काम में सफेदपोश सोने का ठोस कारोबारी भी शामिल है। दोनों प्रतिदिन 20 किग्रा से अधिक सोना बाहर से लाकर मिलावट कर रहे हैं। यह सोना बाजार में लोकल बे्रड के नाम से मशहूर है। कोतवाली स्थित सर्राफा बाजार में इस धंधे से जुड़ा हर व्यक्ति लोकल बे्रेड के बारे में जानता है।


बैंक ब्रेड और लोकल बे्रड का खेल
कोतवाली स्थित सर्राफा बाजार में ठोस सोना खरीदने और बेचने वाले चुंनिंदा बड़े चांदी कारोबारी ही हैं। सर्राफ कारोबार से जुड़े कारोबारी ने बताया कि छोटे सर्राफ ठोस कारोबारियों से ही खरीददारी करते हैं। ठोस सेना बैंक के जरिये ही एक नंबर में आता है। इसे सर्राफ अपनी भाषा में सोने की ब्रेड बोलते हैं। इसका वजन किग्रा होता है। दस तोले या 100 ग्राम ठोस सोने को बाजार में बिस्कुट या टिकट बोला जाता है। वहीं बैंक ब्रेड के पैलरल सट्टेबाज चांदी कारोबारी सु... ने सोने की लोकल ब्रेड की तस्करी कर दी है। सर्राफ ने बताया कि लोकल ब्रेड पुराने जेवरात को गलाकर बनाई जा रही है। लोकल ब्रेड के लिए सोना अधिकांश मध्यप्रदेश के इंदौर और उड़ीसा के कटक शहर से आ रही है। बैंक ब्रेड एक दम प्योर सरकार का ठोस सोना होता है। लोकल ब्रेड पुराने जेवरात को गलाकर बनाया गया सोना है। पुराने सोने को गलाने वाले को नियाजिया बोलते हैं।

लोकल ब्रेड में मिलाते हैं पाउडर
जेवरात से बने सोने को अपनी पहुंच के जरिये गलवाकर सट्टेबाज एक किग्रा वाले सांचे में डाल देता है। उसमें ही रॉथेनियम पाउडर को मिला देते हैं। यह पाउडर सोने में इस तरह मिल जाता जैसे दूध में पानी मिलता है। सट्टेबाज ठीक लोकल ब्रेड पर बैंक वाली मोहर और नंबर ठोंक देता है। बैंक ब्रेड और लोकल ब्रेड को देखने पर कोई भी अंदर नहीं बता सकता है। बैंक ब्रेड में सोने की शुद्धता 99.9 होती है, जबकि लोकल ब्रेड में सोने की शुद्धता 97.70 रखी जाती है। एक किग्रा पर करीब 15 से 18 प्रतिशत मिलावट कर देते हैं। इसे डेढ़ टंच भी कहा जा सकता है।

सट्टेबाज प्रतिदिन बचाता है छह से सात लाख
बाजार भाव के अुनसार दस किग्रा सोना चार करोड़ रुपये का होता है। वह एक किग्रा पर रॉथेनियम पाउडर के जरिये 60 से 70 हजार रुपये कमाता है। सु...। का रोजाना 10 किग्रा सोने की तस्करी है। वह प्रतिदिन छह से सात लाख रुपये सोने में मिलावट करते कमाता है। एक ग्राम सोना करीब चालीस हजार का होता है। दस ग्राम रॉथेनियम पाउडर कुल एक हजार का ही आता है। इस तरीके से दस ग्राम सोने में एक ग्राम राथेनियम पाउडर की मिलावट कराता है।

आगरा- दिल्ली में लगी हैं फरनेस मशीन  
सोने को गलाने के लिए आगरा के अलावा दिल्ली में फरनेस मशीन लगी हुई हैं। इंदौर और कटक से माल आने के बाद मिलावट करने के दिल्ली भी भेजा जाता है। सट्टेबाज चांदी कारोबारी के यहां काम करने वाले लड़के जैकेट और थैलों में सोना ले जाते हैं। जहां सोना गलाया जाता है। मशीन मालिक को प्रति किलो के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। जो व्यक्ति पाउडर की मिलावट कराते हैं। उनसे अलग रुपया वसूला जाता है। यह पूरी एक चेन सिस्टम है। सभी लोग एक-दूसरे को सपोर्ट करते हैं।  

असली ब्रेड की कीमत में बिकती है लोकल ब्रेड  
बाजार में सट्टेबाज की लोकल ब्रेड का बड़ा व्यापार है। वह प्रतिदिन सुबह सर्राफा बाजार के बड़े-बड़े कारोबारी लोकल ब्रेड खरीद लेते हैं। सर्राफाओं से बाह, फतेहाबाद, एत्मादपुर, एटा, इटावा आदि जगहों के सुनार अपनी हैसियत के अनुसार ब्रेड में से सोना खरीदकर ले जाते हैं। लोकल ब्रेड को सर्राफा असली ब्रेड की कीमत पर ही बेचते हैं। शाम आठ बजे के बाद ब्रेड की कीमत सटोरी के गुर्गे लेने पहुंच जाते हैं। यह व्यापार दिन-दिन के उधार पर चलता है। यह पूरी प्रक्रिया शुरू से लेकर आखिरी तक दो नंबर में ही चलती है। इससे सरकार को राजस्व की बड़ी हानि होती है।