पुलिस की अनदेखी: एक जिस्म दो जान हैं एमसीएक्स सट्टोरिया और सट्टा किंग श्याम बोहरा

अवैध धंधा: आम से खास बनाने का सफर.. पार्ट-2

-वर्ष 2018 में पुलिस को मिली थीं श्याम बोहरा और सटोरी चांदी कारोबारी की कई रिकार्डिंग
-बेजेपी नेता ने चुनाव का हवाला देकर एसएसपी पर डलवाया था लखनऊ हाईकमान से दबाव

 

एम डी खान 
आगरा। कोतवाली सर्राफा बाजार में चर्चित चांदी कारोबारी (एमसीएक्स सट्टेबाज) का नाम तत्कालीन एसएसपी की जारी लिस्ट में नाम आया, लेकिन पुलिस उसे रातों-रात बचा गई। श्याम बोहरा पर कार्रवाई हुई। उससे जुड़े कई लोग भूमिगत हो गये थे। सर्राफा बाजार के इस एमसीएक्स माफिया पर भी पुलिस ने लगाम कसनी चाहिए, लेकिन वह सर्राफ प्रतिनिधि मंडल को लेकर अधिकारियों से मिला। खुद को शरीफ होने का दावा पेश करने लगा। वहीं उसकी कई रिकार्डिंग भी मिली। पुलिस ने कार्रवाई के लिए मन भी बना लिया। पुलिस कुछ करती उससे पहले आगरा के एक माननीय की शरण में पहुंच गया। माननीय और सटोरी चांदी कारोबारी का प्रॉपटी के काम में हिस्सेदारी है। हालांकि बचने के लिए सटोरी ने पुलिस और उस नेता के पास एक बहुत मोटा एमाउंट भी पहुंचाया। चांदी कारोबारी ने जिले और जिले से बाहर कई अकूत संपत्ति अवैध तरीके से बनाई हैं।

ज्ञातव्य सर्राफा बाजार का यह सट्टेबाज चांदी कारोबारी सपा सरकार में एक राज्यमंत्री से श्याम बोहरा के जरिये संपर्क में था। श्याम बोहरा पर राज्यमंत्री आंख बंद करके भरोसा करता था। मंत्री के खर्चे श्याम बोहरा ही वहन करता था। सपा शासन में जब कभी कोतवाली के इस सटोरी कारोबारी को परेशानी हुई तो बोहरा ने खुलकर सपोर्ट किया। भाजपा सरकार बनी तो श्याम बोहरा की मुश्किलें बढ़ने लगीं। कई सत्ताधारी नेता बोहरा के खिलाफ हो गये। उसके आका पूर्व मंत्री को भी अपनी इज्जत बचाने के लाले पढ़ने लगे। वह खुद अंडरग्राउंड हो गया। वर्ष 2018 में श्याम बोहरा पर छत्ता पुलिस ने शिकंजा कस दिया। उसे जेल भेज दिया। उसके पास मिले सबूतों के आधार पर एसएसपी अमित पाठक ने 67 सटोरियों की एक लिस्ट जारी कर दी। बोहरा और उसकी पत्नी सहित आठ लोगों पर नामजद मुकदमा हुआ। श्याम बोहरा के मोबाइल में मिली कई रिकार्डिंग को चेक कराने के लिए फॉरेसिंंग लैब भेजा।

भाजपा नेता के पकड़ लिये पैर
पुलिस ने सर्राफा बाजार के इस सटोरी चांदी कारोबारी को टारगेट किया। सटोरी ने खुद को बचाने के लिए सर्राफा कमेटी का सहारा लिया। उसकी दाल नहीं गली तो एक भाजपा के माननीय (मंत्री) के पैरों में गिर गया। श्याम बोहरा को जेल जाने के बाद सटोरी चांदी कारोबारी बुरी तरह से डर गया। उसने अपने आप को बचाने के लिए पैसा पानी की तरह बहा दिया। सूत्र बताते हैं कि भाजपा नेता के प्रदेश के मुखिया से सीधी पकड़ थी। वह उनके साथ भवन में दस साल लगातार बराबर में बैठा था। भाजपा नेता ने सीधी भाषा में कहा कि साहब इस तरह से कारोबारियों पर कार्रवाई हुई तो लोकसभा चुनाव में शहर की इस सीट को बचाना मुश्किल हो जायेगा।

करोड़ों रुपये में हुआ सौदा
हाईकमान ने सूबे के बड़े पुलिस अधिकारी को बताया। वहां से आगरा के आलाधिकारियों पर चुनावी गणित बिगड़ जाने की बात आई। इस पर उस समय के एक अधिकारी से कहा गया कि साहब आपको भी समझ लिया जायेगा। अधिकारी ने भी चुप रहने में ही भलाई समझी। वह नहीं मानते तो ट्रांसफर कराने की पहले ही बैठक हो चुकी थीं। सटोरियों के खिलाफ चला अभियान श्याम बोहरा तक ही सिमट कर रह गया। सर्राफा बाजार का सटोरी चांदी कारोबारी पर से पुलिस की तलवार हट गई। इसी बीच उसने फॉरेसिंक लैब में आॅडियो रिकार्डिंग मामले को डंप करने की जुगाड़ कर ली।

मथुरा के कारोबारी ने कर लिया था सुसाइड
वर्ष 2013 की बात है कि इसकी गद्दी पर एमसीएक्स का सट्टा खेलने वाला मथुरा निवासी एक डॉलर नाम का कारोबारी करीब 50 करोड़ रुपये हार गया था। सटोरी चांदी कारोबारी ने उस पर रुपये देने का दबाव बनाया। गोवर्धन स्थित एक होटल और बड़ी संपत्ति जबरन अपने नाम करा ली थी। डॉलर इस कदर टूट गया था कि एक दिन उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

नोटबंदी में 250 करोड़ किये थे पुराने से नये
वर्ष 2016 में अचानक नोटबंदी हो गई। सटोरी के पास बहुत मोटी रकम घर में रखी हुई थी। उसे हार्टअटैक आने से बच गया। एटा स्थित सटोरी के एक परिचित ने कहा कि उसके अधिक से अधिक रुपयों को बदलवा देगा। वह किसी तरह आगरा से एटा पहुंचा दे। सूत्रों ने बताया कि एक टाटा मैजिक (छोटा हाथी) में 250 करोड़ रुपये रखे, रुपयों के ऊपर रजाई, गद्दे, चारपाई, कुर्सी पुराना सामान रखकर एटा भेजे थे। उस माह में वहां की एक बैंक में अधिक पैसा जमा हुआ। एटा की कई बैंके आज भी जांच के घेरे में चल रही हैं।