अवैध धंधा: आम से खास बनाने का सफर.. पार्ट-1

पान वाला, बेटा बना अरबपति

-सर्राफ की दुकान में झाड़ू लगाने से लेकर, सट्टे के मार्ग होकर पहुंचा चांदी कारोबार में
-एमसीएक्स हो या फिर हवाला कारोबार, देश-विदेश में खड़ा कर लिया है नेटवर्क

एम डी खान 


आगरा। प्रकृति की नियम है जो ऊपर चढ़ा है, वह गिरेगा भी, घराना कोई भी हो, उतार-चढ़ाव आते हैं, जो जमींदार थे उनके परिजन आज चौकीदारी कर रहे हैं, वहीं जो कलतक उन्हीं जमींदारों के यहां झाड़ू-पौंछा करते थे वह राजसी जिदंगी जी रहे हैं, लेकिन आपके सामने ही कोई गलत रास्ता इस्तेमाल कर रातों-रात फर्श से अर्श पर पहुंचता है, तो ईर्ष्या होना भी स्वाभिक है। ऐसा ही एक मामला कथित चांदी कारोबारी का है। इसे कथित इसलिए लिखा है कि इसे चांदी करोबारी कहकर हम अन्य व्यापारियों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते। बतादें कि यह कुछ ही सालों में करोड़ों नहीं अरबों रुपये का मालिक बन गया है। वह डिब्बा कारोबार (एमसीएक्स) के जरिये तमाम अवैध संपत्तियां अर्जित कर चुका है। बाजार में चर्चा है कि वह पिछले दिनों एमसीएक्स के सट्टे में करीब चार सौ करोड़ रुपये हारा है।

कोतवाली क्षेत्र का कथित चांदी कारोबारी मूलरूप से थाना एमएम गेट क्षेत्र का है। इसके पिता मामूली आदमी थे। उन्होंने आजीवन पान की दुकान चलाकर बच्चों परवरिश की। कथित शुरू से ऊंचे मकान और बड़ी गाड़ियां देखकर लालयति हो जाता। वह 15 साल की उम्र में ही सर्राफ की दुकान में झाड़ू पौंछा का काम करने लगा। झाड़ू वाला कहकर उसके दोस्तों ने मखौल उड़ाया, तो इसने जबाव दिया कि सोने-चांदी की दुकान में रहकर अपने को बड़ा सोना, चांदी कारोबारी बनने का सपना जिंदा रखना है। वहां रहकर उसने सोने-चांदी का क, ख, ग, घ सीखा। उसकी बाजार में पैठ बन गई, लोग उसे जानने लगे, इतनी साख बना ली कि सर्राफा कारोबारी उसे अपने पास बिठाने लगे। नौकरी छोड़ वह सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की दलाली करने लगा। उसमें उसे प्रतिदिन चार-पांच सौ रुपये मिल जाते थे, लेकिन उसकी सोच तो कुछ और ही थी। इसके बाद उसने फाटक के अंदर लगे धर्म कांटे पर नौकरी कर ली। बतादें कि बाजार में धर्म कांटे पर तोल के बाद मिली रसीद पूरे बाजार में मान्य होती है। पहले भी दो धर्म कांटे लगे थे और आज भी दो ही कांटे चल रहे हैं।

वर्ष 1998 में चांदी किंग के संपर्क में पहुंचा
कोतवाली क्षेत्र में वर्ष दो हजार से पहले दबंग चांदी कारोबारी की तूती बोलती थी। सर्राफ सूत्र बताते हैं कि दबंग कारोबारी ही एमसीएक्स को बाजार में लेकर आया था। उसके आगे किसी भी बोलने की हिम्मत नहीं होती थी। रुपये के लालच में वह इतना पागल हो गया था कि 1990 में मुंबई के डॉन दाऊद इब्राहिम की एक ट्रक भरके चांदी को हजम कर गया। राजस्थान के एक व्यापारी के जरिये आगरा में चांदी आई थी। दाउद ने धमकी भी दी थी कि मेरी चांदी हड़पने वाला जिंदा नहीं बचेगा। कई बार उसे मारने के लिए किलर आगरा आये, लेकिन वह सफल नहीं हुए। इधर कथित कारोबारी भी एमसीएक्स के सट्टे में लाखों रुपये हार गया। देनदार परेशान करने लगे। दबंग ने कथित कारोबारी की करीब 1998 में मदद डेढ़ लाख रुपये से कर दी। उसके बाद से वह दबंग कारोबारी का मुरीद हो गया।

...मारने के लिए नेता को दी थी सुपारी
दाउद के गुर्गे लगातार आगरा में डेरा डाले हुए थे हालांकि वह सफल नहीं हो पा रहे थे। वर्ष 2002 के बाद दाऊद ने कारोबारी को जिंदा पकड़ने के लिए चार करोड़ में मैनपुरी के एक बड़े नेता को सुपारी दे दी। उस नेता ने अपने सजातीय चांदी कारोबारी के एक दोस्त को बड़ा आॅफर देकर अपने उसे लाने के लिए कहा। चांदी कारोबारी अय्यास किश्म का था। उसे महिला की फोटो दिखा उसका दोस्त फिरोजाबाद एक गिलास फैक्ट्री में ले गया। वहां पहले से ही दाऊद के गुर्गे और वह नेता मौजूद था। नेता ने 20 करोड़ रुपये मंगाने को बोला। चांदी कारोबारी ने अपनी पत्नी के पास कॉल करके बोला घर में दो बैग रखे हैं। दोनों बैग कथित चांदी कारोबारी को देकर फिरोजाबाद भेज दे, साथ ही यह भी कहा कि उसकी जान खतरे में है। हालांकि इससे पहले खुद दुबई के एक मध्यस्थ के जरिये वह दाऊद को दो करोड़ रुपये देने के लिए कहा था, लेकिन डॉन ने मना कर दिया था।

धोखेबाज दोनों बैग लेकर हो गया था फरार
कथित चांदी कारोबारी दोनों बैग लेकर घर से निकला, लेकिन वह फिरोजाबाद नहीं पहुंचा। इस पर दाऊद के गुर्गो ने उसे कांच की भट्टी में जिंदा डाल दिया। उसकी मौत हो गई। सूत्र कहते हैं कि रुपये न पहुंचे तो दबंग कारोबारी ने पत्नी को दूसरी बार कॉल किया। कारोबारी ने कुछ देर की मौहलत मांगी, लेकिन सपा नेता डर गया। उसे लगा कि इसे छोड़ा तो राज खुल सकता है। कारोबारी की पत्नी ने कथित धोखेबाज चांदी कारोबारी की हरकत के बारे में अपने देवर और मायके वालों को बताया। हालांकि वह सभी लोग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सके। कहीं न कहीं उनकों भी डर था कि इतनी बड़ी रकम कहां दिखायेंगे। पुलिस और इनकंम टैक्स वाले उल्टे-सीधे सवाल पूछेंगे। कारोबारी की हत्या पर सर्राफा बाजार एक माह बंद रहा। पुलिस की छीछा लेथन हुई। दबंग कारोबारी का करोड़ों रुपये का बीमा था। पुलिस ने एटा क्षेत्र से एक कंकाल बरामद करके परिजनों को दिया। बीमा लेने की खातिर परिजनों ने कंकाल की पहचान कारोबारी के रूप में कर ली थी।

पत्नी के कपड़े उतार पहनाया था सोना
धोखे से हड़पी रकम को एमसीएक्स के सट्टे में लगा दिया। उसके बाद तो वह सर्राफा बाजार में सट्टे का माफिया बन गया। वर्ष 2005-6 की बात है। कथित कारोबारी ने एमसीएक्स में 17 हजार रुपये किग्रा के हिसाब से बड़ी तादाद में चांदी खरीद रखी थी। अचानक चांदी का भाव 37 हजार हो गया। उसने पूरी चांदी बेच दी। एक साथ इतनी बड़ी रकम देखकर वह बावला हो गया था। सूत्र कहते हैं कि अपनी पत्नी के पूरी तरह कपड़े उतरवाकर सोने से ढक दिया था। उसकी पत्नी आगरा के ही देहात क्षेत्र से है। कथित कारोबारी के नाम के पीछे जो सरनेम लगा है, उसे पढ़कर हर कोई हैरान रह जाता है। उसको लेकर भी लोगों में बहस हो जाती है। सूत्र ने बताया कि जो सरनेम लिखा है वह उस जाति नहीं हैं।