आगरा के इस सटोरिये का धौलपुर के बाड़ी तक फैला है नेटवर्क

अग्र भारत ब्यूरो


-बाड़ी के दो कारोबारियों ने संभाल रखी है क्रिकेट मैच की गद्दियां
-कस्बा में समाजसेवी के रूप में दो बड़े सटोरियों ने बनाई है पहचान

 


आगरा। डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है बॉलीवुड फिल्म का यह डायलॉग कमला नगर के सटोरी अंकुश पर फिट बैठता है। पुलिस ने उसे कई मुकदमों में वांछित किया है। उसे पकड़ने के लिए थाना, एसपी सिटी की टीम के अलावा एसएसपी की टीम भी लगी हुई है, लेकिन वह सभी की पहुंच से बाहर है। उसकी आज भी क्रिकेट मैच की गद्दियां धौलपुर से चल रही हैं। वहां के दो कथित समाजसेवी खुलकर साथ दे रहे हैं। बाड़ी में दोनों ने समाजसेवा की आड़ में क्रिकेट मैच के सट्टे से करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर लिया है। वह दोनों धौलपुर पुलिस के अलावा आगरा पुलिस को भी मिठाई पहुंचाते हैं। न्यू आगरा पुलिस ने गुरूवार को की कार्रवाई में अंकुश के मौसेरे भाई अंकुश मंगल को भी वांछित किया है।

गौरतलब है कि सिकंदरा पुलिस ने पश्चिमपुरी निवासी संजय जैन उर्फ कालिया को वाहन चोरी और नशे में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की तस्करी के मामले में जेल भेजा था। अंकुश अग्रवाल, रिंकू सरदार को मौके से फरार दिखाकर वांछित किया। पुलिस दोनों को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। अंकुश अग्रवाल के अधिकांश रिश्तेदार और दोस्त क्रिकेट मैच का सट्टा लगाने और खिलवाने का काम करते हैं। अंकुश के फुफैरे भाई आशू पर भी न्यू आगरा पुलिस ने कार्रवाई की है। गुरूवार को बल्केश्वर से पकड़े आॅनलाइन सट्टेबाजों में अंकुश अग्रवाल के मौसेरे भाई अंकुश मंगल को वांछित किया है। पुलिस सट्टा किंग अंकुश अग्रवाल को पकड़ने में नाकाम है या फिर पकड़ना नहीं चाहती यह सवाल अभी सवाल ही है। पुलिस छोटे-मोटे जुआरियों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति में लगी है। अंकुश अग्रवाल मूलरूप से जगनेर कस्बे का रहने वाला है। उसके आधे सगे संबंधी वहीं पर रहते हैं। उसकी अधिकांश रिश्तेदारी भी आगरा जिले से सटे राजस्थान के जिला धौलपुर में हैं। उस पर जब भी आगरा में शिकंजा कसा गया वह धौलपुर में डेरा डाल लेता।

बाड़ी में मित्तल और मंगल की जोड़ी
अंकुश अग्रवाल ने अपना नेटवर्क धौलपुर के कस्बा बाड़ी तक फैला रखा है। उसके काम को आज भी बाड़ी से संचालित किया जा रहा है। वहां के दो कथित समाजसेवी ...मित्तल और ...मंंगल बखूबी अंजाम दे रहे हैं। दोनों ने कस्बा में चंद दिनों में पुलिस-प्रशासन में अच्छी पकड़ बना ली है। कोई भी धार्मिक काम हो दोनों आंख बंद करके चंदा देते हैं। एक पूर्व में अपनी समाज की सभा में युवा अध्यक्ष रह चुका है। इनके पूर्वज किराने की दुकान चलाते हैं। यह देखते ही देखते लाखों से करोड़ों में खेलने लगे हैं।

एसएसपी के डर से भागकर पहुंचे थे बाड़ी
बाड़ी सूत्र ने बताया कि तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने जब श्याम बोहरा पर कार्रवाई की थी, उस दौरान अंकुश अग्रवाल, मंटोला का जुआरी और सुनील झाला ने बाड़ी के इन दो कथित समाजसेवी दोस्तों के यहां शरण ली थी। दोनों के घरों में आगरा नंबर की लग्जरी गाड़ियां दिखने लगीं। बाड़ी के एक जागरुक व्यक्ति ने धौलपुर के एक आईपीएस से मुलाकात कर इनकी शिकायत की। शिकायतकर्ता चार दिन बाद अधिकारी और दोनों की दोस्ती को देख हैरान रह गया। उन दोनों को बुलाया तो पुलसिया स्टाईल में था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

धार्मिक काम में खर्च किये थे करोड़
...मित्तल ने सालभर पहले एक धार्मिक आयोजन किया था। उसने अपने दम पर वीआईपी व्यवस्था रखी। कस्बे के लोगों का कहना है कि बिना चंदे के एक व्यक्ति द्वारा इस तरह का आयोजन पहली बार किसी ने किया है। वहीं यह भी चर्चा रही कि अधर्म से कमाया पैसा धार्मिक काम में लगाकर खुद को पवित्र करना चाहता है। जिले में गोशाला का निर्माण हो, या फिर धार्मिक आयोजन इन दोनों के बराबर चंदा देना किसी के बस की बात नहीं। पुलिस-प्रशासन की बेीगार तो यह आंख बंद करके करते हैं। खाकी का मजमा दोनों के आसापास कभी भी देखा जा सकता है। बाजार में लॉच होने वाली कोई भी नई गाड़ी इनके पास पहले होती है।

बड़े होकर भी रह गये छोटे
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जिले में एसएसपी और एसपी सिटी की दो टीमें अपराध पर काम कर रही हैं। एसपी सिटी की टीम प्रतिदिन मनचाहे तरीके से जुआ, सट्टे के खिलाफ एक्शन ले रही है। उनकी कार्रवाई पर बड़ी टीम को हां में हां मिलाना पड़ रहा है। वह चाहकर भी कुछ नही कह पा रही। इसकी अहम वजह दोनों टीम के प्रभारियों के पद हैं। एसपी सिटी टीम प्रभारी इंस्पेक्टर हैं। जबकि एसएसपी टीम के प्रभारी सबइंस्पेक्टर हैं। यह वजह है कि बड़े साहब की टीम पर छोटे साहब की टीम भारी पड़ रही है। अपराधी घूम रहे हैं। गैंगरेप का आरोपी दीपक धनगर आजतक नहीं पकड़ा गया है। सिटी टीम का इस तरफ कोई ध्यान नहीं हैं।