आगरा में सट्टेबाज पहलवान पर खाकी मेहरबान

जिले के टॉप-2 बुकी अंकुश अग्रवाल को पुलिस का क्षमादान.....


-दिल्ली और आगरा में रहकर चलाता है क्रिकैट मैच की गद्दीयां
-जुआ, सट्टा की बदौलत खड़ी कर ली है करोड़ों रुपये की संपत्ति



आगरा। जुआरी, सटोरियों पर कार्रवाई के लिए अधिकारी बेशक सख्ती दिखा रहे हो, लेकिन जुआरी संजय कालिया को छोड़कर अन्य किसी बड़े बुकी पर कार्रवाई नहीं हुई है। वह आज भी अपने पुराने काम में संलिप्त हैं। उनकों बचाने का काम पुलिस और कुछ सत्ताधारी कर रहे हैं। हालांकि कुछेक सटोरियों ने तो शहर और राज्य ही छोड़ दिये हैं। उनके मोबाइल नंबर बंद जा रहे हैं। आईजी की जारी लिस्ट को थानेदारों ने डस्टविन की टोक री में डाल दिया है। यही वजह है कि कमला नगर के अंकुश अग्रवाल, आशु , संजीव और रिंकू सरदार आज भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। आपके अखबार अग्र भारत की खबर पर आईजी ने अमल किया। उसकी तस्दीक कर काल्पनिक ‘रंगा’ नाम के बड़े बुकी का असली नाम अंकुश अग्रवाल उजागर किया।
गौरतलब है कि आईजी ए सतीश गणेश ने तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक के बाद एक बार फिर उसी लिस्ट में तीन नाम और जोड़कर 70 जुआरियों की एक नई सूची जारी की थी। मौजूदा एसएसपी को सख्त हिदायत दी कि कठोर कार्रवाई की जाये। सिकंदरा पुलिस ने पश्चिमपुरी निवासी संजय कालिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उसके दो साथी अंकुश अग्रवाल और रिंकू सरदार को मुकदमें में वांछित किया है। पुलिस ने तीनों पर बाइक चोरी के अलावा नशे की तस्करी का आरोप भी लगाया है। संजय कालिया की छह माह से पहले जमानत होना मुश्किल है। बुकी अंकुश अग्रवाल और रिंकू सरदार को पुलिस चाहे जब हिरासत में ले सकती है, लेकिन पुलिस दोनों को बचाने का काम कर रही है। अंकुश अग्रवाल के फुफेरे भाई आशू अग्रवाल भी बुकी जौली के साथ फरार है। परिजनों के मुताबिक संजय कालिया को पुलिस एमपी के गुना जिले से गिरफ्तार करके लाई थी। हालांकि पुलिस ने प्रेसवार्ता कर उसे सिकंदरा क्षेत्र से चेकिंग के दौरान गिरफ्तार दिखाया। पुलिस निश्चय कर ले कि अंकुश अग्रवाल और रिंकू सरदार को पकड़ना है, तो वह दोनों को तीन दिन में धरती के किसी भी कौने से खोज लायेगी।  


अधिकांश सटोरियों के पैतृक घर हैं जगनेर
कमला नगर निवासी सट्टा किंग अंकुश अग्रवाल मूलरूप से जगनेर का रहने वाला है। अंकुश ने14 साल की उम्र में फुफैरे भाई संजीव के साथ जुआ, सट्टे और बुक शुरू की थी। वह जगनेर से भागकर सबसे पहले जगनेर निवासी ही सुनील झाला से मिले। झाला पूर्व में  इंदौर से भागकर कारगिल चौराहे पर रहने लगा था। सिकंदरा के सेक्टर-11 निवासी पवन चौहान हत्याकांड में संजय कालिया के साथ सुनील झााला भी नामजद था। सुनील झाला के कहने पर ही अंकुश और संजीव ने सट्टे का काम शूरू कर दिया। उसने धीरे-धीरे करके अपने सभी रिश्तेदारों को बुला लिया।  

अंकुश के रिश्तेदार भी मामूली से बन गये खास
अंकुश अग्रवाल के पार्टनर संजीव ने अपने दो भाई भी जुआ, सट्टे के काम से जोड़ लिये। उनमें से एक राजनीति में चला गया और दूसरे ने कॉलेज खोल लिये हैं। संजीव और आशू आज भी क्रिकैट मैच, जुआ के अड्डे चलवा रहे हैं। अंकुश अग्रवाल ने अपने सगी मौसी के अंकुश मंगल और अनूप मंगल दोनों को जगनेर से बुला लिया। एक को मटके का सट्टा लगाने का काम सौंपा और दूसरे को जुआ खिलवाने का दिया। दोनों बल्केश्वर में रहते हैं। अंकुश अग्रवाल और सुनील झाला के पिता आज भी जगनेर में छोटी-छोटी दुकान चलाते हैं। आज से 15 साल पहले जो बाइक खरीदने की हैसियत नहीं रखते थे वह आज लग्जरी गाड़ियों में चल रहे हैं।

अंकुश की पत्नी को है गंभीर बीमारी
अंकुश अग्रवाल की पत्नी को गंभीर बीमारी हुई है। वह दो साल पहले आगरा छोड़ दिल्ली के पटेल नगर में शिफ्ट हो गया है। हालांकि उसने अपना धंधा बंद नहीं किया है। आज भी पूरा कारोबार बदस्तूर चल रहा है। करीब एक दर्जन लोगों की टीम उसके इस धंधे को संभाल रही हैं। पत्नी के इलाज में लाखों रुपये खर्च कर चुका है। हालांकि वह रुपये हेल्थ इंशयोरेंश के तहत मिले हैं। अंकुश अग्रवाल पर कई बैनामी संपत्तियां हैं। उसके साथ जुड़े कर्मचारियों को अच्छा वेतन देता है। वह उसके साथ दगा नहीं करते।