शहर के रहीशजादे यंगस्टर्स को बना रहे उड़ता पंजाब नशाखोरी


-शहर से हर आठ दिन में मनाला को पहुंच रही युवाओं की ट्रिप
-पुलिस एक माह में कार्रवाई कर पकड़ चुकी है मारी मात्रा में गांजा


आगरा। शहर में चल रहे हुक्का-बार और नशेघोरी में झूम रही युवा पिढ़ी को देख वर्ष 1971 में आई फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा का गाना दम मारो दम मिट जाये गम की याद दिला रहे हैं। उस दौरान इस फिल्म को देखने वाले युवा कल्पना में भी नहीं सोच पा रहे थे कि उनकी युवा पीढ़ी इस नशे की गिरफ्त में होगी, लेकिन वह सब शहर के प्रमुख स्थानों पर हो रहा है। रहीसजादे नशेखोरी की लत को पूरा करने के लिए हिमाचाल के शहर मनाला तक पहुंच रहे हैं। वहां से आगरा में लाकर नशे का सामान यंगस्टर्स को उपलब्ध करा रहे हैं। इस खेल में कई नामचीन परिवार के युवा शामिल हैं। जो फिल्म उड़ता पंजाब की तरह युवाओं को ड्रग्स में डूबो रहे हैं। नशेखोरी के इस धंधे को धरती के कथित भगवान भी बढ़ावा दे रहे हैं।  

युवा कारोबारी के मुताबिक शहर नशेखोरी का बहुत बड़ा हव बनता जा रहा है। नशेखोरी की लत को बढ़ाने में कुछ श्रेय विश्व विख्यात ताजमहल को भी जाता है। यहां आने वाले विदेशी पर्यटक नशे की लत को पूरा करने के लिए किसी भी कीमत में ड्रग्स लेने के लिए तैयार रहते हैं। इस नशे की तस्करी के लिए बड़ी संख्या में लोग लगे हुए हैं। इसके अलावा जवान हो रही पीढ़ी (12 से 20 साल) में नशे की लत तेजी से फैल रही है। यह नशा शराब या सिगरेट का नहीं है, बल्कि गांजा, कोकीन, अफीम, डेंडराइट, स्मैक और नशीली दवाओं का है। स्मैक का नशा युवाओं के दिलो दिमाग पर इस कदर छा जाता है कि 15 दिन में ये इसके आदी हो जाते हैं। इसकी तलब मिटाने के लिए स्मैकची को जैसे-तैसे स्मैक का जुगाड़ करना पड़ता है। स्मैक नहीं मिलने पर युवाओं में गुस्सा होना, झगड़ा करना इत्यादि आदतें सामान्य हो जाती है।

हिमाचल से मनाला क्रीम हो रही सप्लाई
शहर से आधा दर्जन युवाओं ने स्मैक (मनाला क्रीम)की तस्करी करने का नया तरीका तलाश कर लिया है। यह युवक बड़े रहीसजादों की औलादें हैं। दोस्तों के साथ ट्रिप में जाते हैं। यह हर बार नया मुर्गा(युवक) साथ लेकर जाते हैं। युवक को मनाला क्रीम की एक बार आदत हो गई। उसे फिर वहीं ब्रांड चाहिए। उसे देने के लिए रहीसजादे मुंह मांगी रकम वसूलते हैं। इस कारोबार में सदर क्षेत्र के एक बड़े कारोबारी का बेटा भी शामिल है। हरीपर्वत क्षेत्र के एक नामचीन डॉक्टर का बेटा इस नशे का आदि रह चुका है। हालांकि फिलहाल वह खुद भी डॉक्टर बन गया है। नशे की लत से वह खुद को आज भी दूर नहीं कर सका है। गर्मियों की छुट्टी में बुकी और बड़े सटोरी भी यहां आते-जाते रहते हैं। तीन साल पहले दीवानी के एक अधिवक्ता की पत्नी और विकलांग बेटी की हत्या करने के बाद आरोपी मनाला में ही जाकर छिप गया था। वहां पुलिस को बड़ी मशक्त के बाद आरोपी पकड़ में आया। स्मैक बड़ी तादात में हिमाचल से तस्करी करके लाई जा रही है।

हवाओं में शामिल धुंऐ से हो जाता है नशा
मनाली शहर से करीब 28 किमी ऊंचाई पर स्थित मनाला तक पहुंचने के लिए 26 किमी तक तो टैक्सी जाती है। उसके बाद ढाई किमी पैदल चलकर जाना होता है। मनाला पर इंडियन के साथ इजराइलियों के गेस्ट हाउस बने हुए हैं। नशे की लत को पूरा करने के लिए लड़के और लड़कियां गेस्ट हाउस में रुकते हैं। वहां पुलिस कोई रोक-टोक नहीं करती है। वहां एक नदी भी है। उसे पार करके जाने पर दर्जनों डिस्कों बने हुए हैं। डिस्कों के अंदर लड़के-लड़कियां सिगरेट पीते हैं। कमरे धुंए से भरे हुए होते हैं। वहां सभी सुध-बुध खोये हुए होते हैं। जो नशा नहीं करता है, वह आदमी एक मिनट भी नहीं रुक पाता। वहां सांस लेने में ही नशा हो जाता है। 24 घंटे शराब और  बीयर उपलब्ध होती है। डिस्कों के अलावा छोटे-छोटे टेंट लगे हुए हैं। उनके अंदर लड़के-लड़कियां नशे में झूमते रहते हैं। एक तोला मनाला क्रीम की आठ हजार रुपये में मिलती है। वहीं एक सिगरेट 800 रुपये की है।
 
स्मैक अलावा नशे के और भी साधन
शहर की गली-गली में नशे के दीवाने झूमते दिख रहे हैं। सुनसान स्थानों पर स्मैक और नशीले इंजेक्शन लगाते देखे जा सकते हैं। शहर में सबसे ज्यादा युवाओं के अंदर स्मैक का नंशा फैल रहा है। कई स्थानों पर हो रही स्मैक की बिक्री युवाओं को बर्बाद कर रही है। महंगा नशा नशेड़ी के साथ ही पूरे परिवार को तबाह कर रहा है। नशे की चपेट में आए युवा अब 10 रुपए के इंजेक्शन और नशीली गोलियों से नशे की प्यास शांत कर रहे हैं। क्षेत्र में युवा पिढ़ी द्वारा नशे के ज्यादा आदि हो जाने के बाद से क्षेत्र में चोरी, लूटपाट, मारपीट जैसी घटना लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के आकड़े देखे जाये तो क्षेत्र में हुई चोरी, लूटपाट सहित वारदातों में सबसे ज्यादा युवा वर्ग के आरोपी हैं।

तस्करों को पकड़ चुकी है पुलिस
सोमवार को सदर और आरपीएफ ने मिलकर डेढ़ कुंटल से अधिक गांजा पकड़ा है। तस्करी करके ला रहे युवा भी पकड़े गये हैं। उनका कहना है कि शहर में कई स्थालों पर उनकी खपत देनी थी। पुलिस उनकी तलाश में है। आठ दिन पहले एत्माउद्दौला पुलिस ने सुशील नगर से एक महिला को गांजे की तस्करी करते पकड़ा। पुलिस उसके पति को भी ड्रग्स के व्यापार में जेल भेज चुकी है।



इस तरह खतरनाक है नशा
-मादक पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है
- नशे से शरीर के कई अंगों पर एक साथ विपरीत असर पड़ता है
- नशा करने वाला हमेशा चिड़चिड़ा, मानसिक तनाव से ग्रसित होता है
- नशेड़ी को अपने आसपास के माहौल से ज्यादा मतलब नहीं होता है
- नशा करने वाला आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक रूप से कमजोर होता है
- नशा दुर्घटनाओं का शिकार भी बनता है। वह परिवार से दूर हो जाता है।
-नशा पूरा करने के लिए वह कोई भी अपराध करने को तैयार रहता है।
-बच्चियों और महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार की वारदात को अंजाम आरोपी द्वारा नशे की हालत में हुई हैं।