मर गया पीडित, पैसे वसूलती रही पुलिस, क्या है मामला

-सुरीर थाने के गांव लक्ष्मनपुरा का है मामला
-पीडित की मौत के बाद दर्ज की रिपोर्ट
-आनन फानन में सात लोगों के खिलाफ दर्ज किया हत्या का मुकदमा

मथुरा। पीडित मर गया और पुलिस अपनी मनमानी करती रही। हद तो तब हो गई जब पीडित परिवार को मृतक शाहिद का शव हासिल करने के लिए भी पुलिस के सामने गिडगिडाना पडा। 

 22 जनवरी को सुरीर के गांव लक्ष्मनपुरा में दबांगों द्वारा की गई मारपीट में घायल हुए 35 वर्षीय शाहिद पुत्र अलीशेख  ने आगरा में इलाज के दौरान दमतोड दिया। षाहिद की मौत के बाद आगरा के अस्पताल ने पुलिस केस बाताते हुए शव देने से इनकार कर दिया और पुलिस को शव सुपुर्द करने की बात कही। इसके बाद पीडित परिजन फिर सुरीर पुलिस के सामने गिडगिडाये, इस बीच कई दर्जन ग्रामीण एसएसपी कार्यालय पहुंच गये। इसके बाद सुरीर पुलिस सक्रिय हुई और आगरा से शाहिद का शव पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।   

गुरूवार को एसएसपी कार्यालय पहुुंचे मृतक के भाई भूरा ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हमारी कोई मदद नहीं की। हमारी रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की। तीन लोगों को पुलिस ने रात में उठाया और 60 हजार रूपये लेकर एक को छोड दिया। आरोप यह भी लगाया कि एक लाख रूपये में दो ओर लोगों को पुलिस छोडने जा रही थी। इसी बीच उनके भाई की मौत की खबर मिल गई और पुलिस ने छोडे गये व्यक्ति को भी पकड लिया। इससे पहले पुलिस ने उनकी कोई सुनने वाला नहीं था। पुलिस उन्हें टरकाती रही।  

 

रास्ते को लेकर की थी दंपति की पिटाई
मृतक का घर गांव के रास्ते में सबसे अलग है, उसके घर को जाने के लिए एक ही छोटा सा रास्ता मिला हुआ है। इस रास्ते पर कुछ लोग अपना गोबर डाल रहे थे। हमारा रास्ता रोक दिया गया। इसी बात को लेकर षाहिद और उसकी पत्नी को जमकर पीटा गया, जिसमें षाहिद की मौत हो गई।

 

प्राइवेट इलाज की कह कर वापस लौटा दिया

पीडित परिवार का कहना है कि पुलिस ने उन्हें मेडिकल का भी मौका नहीं दिया। सुरीर पुलिस ने प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की कह कर वापस लौटा दिया। पहले छाता, फिर वृंदावन और आगरा में इलाज कराया।  

 

एसओ बोले "मैं पीछे पडा रहा लेकिन उन्होंने तहरीर नहीं दी"

थाना इंचार्ज सुरीर  ने बताया कि 22 जनवरी को झगडा हो गया था। इन लोगों के पीछे में झगडे के दिन से ही पडा था, जो भी बात होगी तरमीम हो जाएगी तहरीर दे दो, दो दरोगा भी लगे रहे, हराम खोरों ने लिख कर ही नहीं दिया। अधिकारी भी नाराज हो रहे थे कि तहरीर नहीं ले पा रहे हो, जब वह मर गया तब मैंने जबरर्दस्ती तहरीर ली है, सात लोगों के नाम हैं और 302, 307  में  सीधा मुकदमा लिखा गया है। मैंने पीछे पड कर मुकदमा दर्ज कराया है। कप्तान साहब के यहां पहुंच गये।