फाच्र्यूनर कार में चलने वाला है ये गैंग कैसे उड़ता है आपका मोबाइल, रहें सावधान

आगरा।   दो छात्र, दो मोबाइल दुकानदार, एक रेडिमेड गारमेंट्स समेत अन्य कई व्यापारी से मोबाइल ले जाने वाला यह गैंग नए तरीके से शहर में अपने पार पार चुका है । गैंग ने पहला शिकार  रकाबगंज के एमबीए छात्र शिवम किशोर को बनाया है । शातिरों ने उसको  25 दिसंबर को संजय प्लेस में मॉल के पास बुलाया। गैंग के सदस्य 35 लाख की फाच्र्यूनर कार में आए थे। उसका 55 हजार रुपये का आईफोन पसंद करके नेफ्ट से भुगतान की बात कही। इसके बाद  मोबाइल पर उसके खाते में रकम ट्रांसफर करने का मैसेज भी आ गया। जब कई घंटे बाद भी खाते में रकम नहीं पहुंची तो शिवम को शक हुआ। जब शिवम् ने उनसे फ़ोन पर पैसे न आने की बात कही तो गिरोह के सदस्यों ने दो दिन तक बात की पर बाद में अपना नंबर बंद कर लिया।
गिरोह ने अगला शिकार  26 दिसंबर को  ताजगंज निवासी युवक दीपक को बनाया। उसे मॉल पर बुलाने के बाद इसी अंदाज में 22 हजार रुपये का मोबाइल ले लिया। उसके खाते में भी नेफ्ट से रकम ट्रांसफर करने की बात कही। रकम ट्रांसफर करने का मैसेज उसके मोबाइल पर भी आया था पर पैसे   खाते में नहीं पहुंचे, ठीक इसी अंदाज़ में  पीडि़त छात्र दीपक ने शातिरों के मोबाइल नंबर पर बात की और  दो दिन बाद  मोबाइल बंद हो गया ।
इसी तरह साकेत कॉलोनी स्थित शिवाजी मार्केट में पांच जनवरी को मोबाइल दुकानदार जावेद के पास दो युवक आए। उनसे 16 हजार रुपये का सेकेंड हैंड मोबाइल खरीदा। पेटीएम से भुगतान करने की कहा। इसके बाद भुगतान का मैसेज दुकानदार के फोन पर भी आ गया लेकिन पैसा नहीं पहुंचा। दुकान में सीसीटीवी कैमरा लगा था जिसके माध्यम से गिरोह के सदस्य कैमरे की नजर में कैद हो गए हैं। अब दुकानदार  ने सीसीटीवी फुटेज को सोशल मीडिया वायरल कर दिया है । साइबर सेल ने साइबर क्रिमिनल्स को सबक सिखाने के लिए तरीका निकाल लिया है। अब जिस डोमेन नेम से मैसेज भेजे जाते हैं उसका आइपी एड्रेस पता कर गिरोह तक पहुंचा जाएगा।
गिरोह के सदस्य पहले फेक मैसेज तैयार करते हैं। जिसे शिकार के मोबाइल पर भेजा जाता है। मैसेज में  ट्रांजेक्शन की जानकारी दी जाती है। शिकार को लगता है कि मैसेज नेफ्ट या पेटीएम से आया है और आसानी से जाल में फंस जाता है।