ग्रामीणों को बेमौत लील रही कच्ची शराब

-अड़ींग में छह दशकों से फल फूल रहा कच्ची शराब का धंधा
-कई दर्जन महिलाओं को जवानी में ही तोड़नी पड़ी चूडियां
-पुलिस, आबकारी और जिम्मेदार अफसरों की नाकामी

मथुरा। सुमित्रा के पति ने कच्ची शराब की लत नहीं छोड़ी तो वह छाती में दर्द बताते हुए ही दो वर्ष पूर्व दुनिया से बिदा हो गया। वहीं सुकन के पति की मृत्यु 14 वर्ष पूर्व खून की उल्टियों के साथ हुई। पांच दशकों से फल फूल रहा कच्ची शराब का धंधा एक सैकड़ा के ज्यादा परिवारों को जीते जी और मरने के बाद दर-दर की ठोकरें खाने को छोड़ गया। पुलिस, आबकारी और जिम्मेदार अफसरों ने नतो इस धंधे में लगे लोगों के रोजगार की कोई सुध ली ना ही शराब के कारण बैधव्य झेल रहे परिवारों का हाल जानने की किसी ने जहमत उठाई। शराबियों के बच्चे भोजन के लिए तरस रहे हैं और शराब बेचने वाले मालामाल हो चुके हैं। 
अनवर की पत्नी जरीना आठ साल से बैधव्य झेल रही है। पति की मृत्यु शराब के चलते 45 वर्ष की अवस्था में हो गई। उसने अपने हाथोें से इतना काम किया है कि उन पर ठेक पड़ चुकी हैं। सात बच्चों का पालन पोषण वह भी पति के न रहने के बाद करना आसान नहीं। तीन बेटियों में दोकी शादी करने के लिए जरीना को अपना मकान भी बेचना पड़ा। अभी भी एक बेटा और बेटी की शादी की चिंता उसे इस उम्र में भी हर दिन खेती में मजदूरी करने को उद्यत बनाए हुए है। जरीना कहती हैं कि कच्ची शराब बंद करने को सरकार को जोर लगाना चाहिए। मोदी के राज में बंद हो जाए तो हो जाए प्रयास पूर्व में भी बहुत हुए हैं। 

केस एक
हसीना के पति सबीस की मृत्यु 15 साल पहले हुई। वह दुधमुहे बच्चे छोड़कर कच्ची शराब की भैंट चढ़ गया। उसके पति का नास्ता शराब से होता था। वह बताती हैं कि उसके पति का दिन भी कच्ची शराब बनाने वाले भांतुओं में निकलता था और रात भी वहीं होती थी। हसीना उम्र के 35 वें पायदान पर पहंुचते ही बिधवा हो गई। उसके पास तीन बेटा और तीन बेटी हैं । दो लड़के एवं दो लडकियों की शादी हो गई। पति की मृत्यु के बाद उसे भी परिवार की जिम्मेदारी पूरी करने को अपना मकान बेचना पड़ा।
इसे संयोग मानें या अशिक्षा का दंश जरीना और हसीना दोनों बहन हैं और कच्ची शराब की लत के चलते अपने पतियों को खो चुकी हैं। हीरा और सुकन भी बहन हैं। 

केस दो
हीरा के पति हुकम सिंह को मरे आठ वर्ष हो चुके हैं। वह भी भरी जवानी में उसे अकेला छोड़ गया। पांच छह साल के बच्चों को हीरा ने अपने पसीने से सींचकर पाला है। आज उसे बिधवा पैंशन मिल रही है लेकिन बडेघ् बेटे की शादी का एक लाख का कर्जा उसे हर दिन परेशान करता रहता है। वह कहती है कि पति के जीते जी बच्चे भूखे मरते थे कच्ची शराब बनाने वाले मौज मारते थे। 

केस तीन
सुकन के पति कैलाश की मृत्यु 14 साल पूर्व हुई मौत। इस समय सुकन 40 वर्ष की हैं। उसके पति को खूनोें की उल्टी होने लगीं और मौत हो गई। कच्ची शराब के चलते उसे हो गई। जिसका इलाज भी शराब की लत न छोड़ने के कारण नहीं हो पाया। उसके तीन बच्चों की मृत्यु पति के सामने ही हो गई। अब तीन बच्चे हैं जिनका पालन पोषण वह मेहनत मजदूरी करके कर रही हैं। हंसते खेलते सास श्वसुर चले गए। 

केस चार 
सुमित्रा के पति करन सिंह की मृत्यु छाती में दर्द से हुुई कच्ची शराब के आदी करन के छाती के दर्द को चिकित्सक भी शांत नहीं कर पाए। सुमित्रा इस समय 38 वर्ष की हैं। उनके पास तीन पुत्र व दो पुत्री हैं।

पुलिस की नाक तले चलती हैं भट्टी
अड़ींग, गोवर्धन, कोसी से लेकर सूबे के अन्य जनपदों में भी भांतू समाज के लोगों की भट्टियां आजादी के बाद से ही पुलिस के चैकी थानों के करीब ही चलती रही हैं। अबकारी हो या पुलिस मार्च के आस-पास या फिर अंग्र्रेजी और देशी शराब के ठेकेदारों के इशारे पर ही इस धंधे पर हाथ डालते रहे हैं।

रोजगार फिर भी धंधे से परहेज नहीं
एक समय था जब इस जाति के लोगों को खाने दाने के लाते रहते थे। आज इन लोगों को समाज में बराबरी का स्थान मिलने लगा है। यह बात अलग है कि नतो लोग इन लोगों को मजदूरी देना पसंद करते हैं और ना इस जाति के लोग मजदूरी करना पसंद करते हैं लेकिन आज इन लोगों के पास काम है। बच्चे सरकारी नौकरी में भी हैं। आर्थिक स्थिति भी ठीक है लेकिन मोटी कमाई का धंधा छूटते नहीं बनता।