चार साल में एक गांव की सूरत नहीं संवार सकीं सांसद हेमा मालिनी

चार साल में एक गांव की सूरत नहीं संवार सकीं सांसद हेमा मालिनी 
-लाख प्रयास के बाद भी अपने गोद लिये गांव रावल को नहीं बना सकीं आदर्श गांव
-आज भी उतना ही बदहाल है रावल, जितना चार साल पहले थे
-ग्रामीण बोले किसी काम के नहीं हैं हमारे जनप्रतिनिधि, बस बात बनाते हैं
मथुरा। सरकारी कर्मचारियों की सरकारी ढर्रे पर काम करने की आदत और अदां के आगे सरकार भी पानी मांग रही है। प्रदेश सरकार ने अपने मंत्रियों को गांव गांव जाकर चौपाल लगाने और ग्रामीणों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी देने की जिम्मेदारी सौंपी है। मंत्री महोदय एक बार जिस गांव में चौपाल लगा चुके हैं, उस गांव में दुबारा जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, दूसरी और यही हालत सांसद हेमा मालिनी की है। सांसद ने चार साल पहले मथुरा के तीर्थ स्थल गांव रावल को गोद लेकर आदर्श गांव के रूप में रावल का विकास कर देश के लिए मॉडल गांव के रूप में प्रस्तुत करने का दंभ भरा था। 
चार साल बाद हालत यह हो गई है कि अब सांसद रावल जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही हैं। गांव की जो हालत चार साल पहले थी वही आज है। इन चार सालों में गांव के विकास के लिए कई योजनाएं बनीं, कई बार सर्वे हुए ग्रामीणों को लगा कि अब कुछ अच्छा होगा लेकिन यह कवायद धरातल पर नहीं उतर सकी। 
गांव में सरकारी स्कूल की इमारत में इस दौरान कुछ सुधार कराया गया लेकिन अध्यापक अब भी स्कूल में समय से नहीं पहुंच रहे और नहीं सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने की ललक ग्रामीणों में इस दौरान बढ़ी, सरकारी स्वास्थ्य केंन्द्र की इमारत लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई लेकिन इस इमारत पर ताला पड़ा रहता है और यहां तैनात चिकित्सक कभी कभार ही ग्रामीणों को नजर आते हैं। गांव में आरओ प्लांट लगाया गया लेकिन इससे पार्टी से जुड़े लोगों ने ही धंधा शुरू कर दिया और अब ग्रामीणों को पैसे से पानी मिल रहा है। पहले तो आदर्श गांव में कम कराने की उत्सकुता सांसद ने ही नहीं दिखाई और जो काम हुआ उसे सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों ने पलीता लगा दिया। 
 
स्वास्थ्य केंद्र पर दो चिकित्सा प्रभारी हैं तैनात
गांव रावल के स्वास्थ्य केंद्र पर दो केंद्र प्रभारी डा.अमित अग्रवाल और डा.प्रदीप त्रवेदी की तैनाती है लेकिन इनके ग्रामीणों को दर्शन कभी कभार ही होते हैं। हालत यह है कि  अगर कोई ग्रामीण बीमार होता है तो उसे गांव से 15 किलोमीटर दूर दिखाने जाना पड़ता है। रात के समय छोटी मोटी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए लोगों को यह दूरी तय करनी पड़ती है। 
 
सीएमओ बोले चिकित्सकों की कमी है
सांसद हेमा मालिनी के गोद लिये गांव रावल में ही स्वास्थ्य केंन्द्र पर स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी नहीं पहुंचते हैं, इस सवाल के जबाव में मुख्य जिला चिकित्साधिकारी शेर सिंह ने सपाट सा जबाव दिया कि चिकित्सकों की कमी है। 
 
स्वास्थ्य केन्द्र पर पड़ा रहता है ताला
ग्रामीण महिला शकुंतला ने बताया की रात में मेरे बेटे के पेट मे दर्द था, जिसे मैंने शहर ले जाकर दबा दिलाई। गांव में कहने को तो स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन डॉक्टर के न होने से पूरा गांव परेशान है। कई बार शिकायत के बाद भी गांव में कोई डॉक्टर नही आया। 
 
फोटो-23यूपीएच मथुरा01, 01ए
चित्र परिचय-रावल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट और कमरों पर चिकित्सकों के नहीं पहुंचने से लटके ताले।