अब 50 साल पहले वाला हिंदू समाज नहीं रहा: कोकजे

-राममंदिर के लिए समर्थन जुटाने को वृंदावन में दो दिवसीय प्रवास पर वृंदावन पहुंचे विहप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष
-दलितों के बच्चे जब खुद मैरिटम आने लगंगे लोग आरक्षण को भूल जाएंगे
-1000 वर्ष की गुलामी के बाद भी 85 प्रतिशत भारतीय समाज अपनी अपरंपराओं से जुड़ा है
 
मथुरा। विश्व में भारतीय समाज ही है जहां 1000 साल की गुलामी मे बाद भी 85 प्रतिशत लोग अपनी सदियों पुरानी परंपराओं से जुड़े हैं। 50-60 साल में हिंदू समाज में बहुत परिर्वतन आया है। अब हम 50 साल वाला समाज नहीं रह गये हैं। सामाजिक समरसता आई है और समाज में बड़े स्तर पर बदलाव आया है। राममंदिर निर्माण को साधु संतों का समर्थन जुटाने के लिए दो दिवसीय दौरो पर वृंदावन में ठहरे विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने विश्वास जताया कि कोर्ट की राम मंदिर निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।  
उन्होंने कहाकि हम कोई भेदभाव नहीं मानते। आरएसएस आज नहीं 1925 से बिना भेदभाव के काम कर रहा है। यह कोई राजनीति की बात या वोट पॉलिटिक्स की बात नहीं है। कभी भी जातिगत आधार पर भेदभाव नहीं हुआ, हिंदू धर्म के एक संगठन के रूप में आरएसएस आज तक चला आ रहा है, विश्व हिंदू परिषद भी वही काम कर रही है।
आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहाकि सामाजिक असमानता के कारण कुछ लोग अक्षम रह जाते हैं। आरक्षण के माध्यम से अक्षम व्यक्ति को संरक्षण देते हैं। आरक्षण तो महिलाओं के लिए भी किया गया, लड़कियों को स्कूुलों में एडमिशन के लिए आरक्षण दिया गया। लड़कियां आज लड़कों से भी अच्छा कर रही हैं। इसी तरह दलितों के बच्चे भी अच्छा करने लगेंगे, लोग आरक्षण को भूल जाएंगे। जब ये बच्चे खुद मैरिट में आने लगेंगे तो आरक्षण खद खत्म हो जाएगा। यह संवैधानिक व्यवस्था है और जब तक असमानता खत्म नहीं हो जाती यह व्यवस्था रखनी पड़ेगी। 
एएमयू में जिन्ना की तस्वीर इस देश में रावण की पूजा करने वाले भी मिल जाएंगे, जिन्ना के मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए। यह बातें भटकाने वाली हीं एएमयू को यह खुद को तय करना है कि उन्हें किसे आराध्य मानना किसे तवज्जो देनी है। जिन्ना ने हमेशां कहाकि मुझे विभाजन करना है, ऐसे लोगों की वकालत करने वालों को खुद सोचना चाहिए। 
विहिप के जितने भी शक्ति केंद्र हैं उनसे और वृंदावन में विहिप की सोच से सहमति रखने वाले संतों से विचार विमर्श के लिए यह प्रवास है। राम मंदिर निर्माण को मूर्तियां बन रही हैं, खम्भे बन रहे हैं, जमीन पर मतभेद है, इसे सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। अभिलेख के अलावा लोगों ने नये नये अभिलेख पेश कर न्यायालय का समय जाया करने की कोशिश की। 15 से 16 हजार अभिलेखों जो उर्दू और फारसी में थे इन का अनुवाद भी प्रदेश सरकार ने कर दिया है, सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियां खत्म हो जाने के बाद केस सुनवाई के लिए लग जाएगा। षणयंत्र पूर्वक हिंदू समाज के विभिन्न वर्गों में वैमनश्य पैदा करने का काम किया जा रहा है। हम इस दिशा में काम कर रहे हैंद्ध।