पीएनबी घोटाले के बाद छोटे उद्योगों को कार्यशील पूंजी मिलने में आ रही हैं मुश्किलें

नयी दिल्ली.... उद्योग देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 11,400 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद बैंकों में बढ़ी सतर्कता से उद्योगों के लिए साख-पत्र और रिण गारंटी पत्र (एलओसी, एलयूटी) जारी करवाने में दिक्कतें हो रही हैं तथा खासतौर से लघु उद्योगों को कार्यशील पूंजी हासिल करने में परेशानी बढ़ी हैं। यह बात उत्तर एवं मध्य क्षेत्र के एक प्रमुख उद्योगमंडल के अधिकारी ने कही है। पीएचडी चैंबर की विदेशी विनिमय समिति के चेयरमैन और आर्थिक मामलों की समिति के सह-अध्यक्ष श्याम पोद्दार ने आज कहा, ‘‘पीएनबी घोटाला सामने आने के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मझोले (एमएसएमई) उद्यमों के समक्ष कार्यशील पूंजी की समस्या बढ़ी है। छोटे उद्योगों पर यह असर ज्यादा है।
उन्होंने कहा बैंकों में डर है। वे इकाइयों के पक्ष में नए साख-पत्र अथवा गारंटी-पत्र जारी करने के मामले में टाल मटोल करने लगे हैं। इससे रिण और कार्यशील पूंजी की समस्या खड़ी हो रही है।
पोद्दार ने कहा कि बैंकों से कार्यशील पूंजी मिलने में आ रही दिक्कत के चलते ही विदेशी मुद्रा बाजार में डालर की मांग तेजी से बढ़ी है और यही वजह है कि डालर के मुकाबले रुपया हाल में कमजोर पड़कर 65 रुपये प्रति डालर से ऊपर निकल गया है। डालर वायदा सौदों में भी रुपया हल्का पड़ गया है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को कर्ज तो मिल रहा है लेकिन नियमों को काफी सख्त कर दिया गया है। पोद्दार ने रिजर्व बैंक द्वारा 12 फरवरी को जारी एक सर्कुलर का हवाला देते हुये कहा कि बैंकों को एलओयू और एलओसी को फिलहाल रोके रखने के लिये कहा गया है। बेहतर रिकार्ड वाले ग्राहकों को इसे जारी करने पर मार्जिन मनी बढ़ा दी गई है। जिन्हें जारी किया जा रहा हैउनसे अतिरक्त मार्जिन लिया जा रहा है। सोना, हीरा कारोबारियों से तो साख पत्र अथवा गारंटी पत्र जारी करने में 110 प्रतिशत तक मार्जिन की मांग की जा रही है। पीएचडी उद्योग मंडल के अध्यक्ष अनिल खैतान ने कहा कि यह बैंकिंग प्रणली की असफलता है, कुछ लोगों के गलत कार्यों का खामियाजा समूचे उद्योग जगत को नहीं भुगतना चाहिये। रिजर्व बैंक और अन्य बैंकों को आंतरिक लेखा परीक्षा प्रणाली को चुस्त दुरुस्त बनाना चाहिये, अन्यथा विदेशी निवेशकों में भी इसका गलत संकेत जायेगा। उन्होंने पीएनबी घोटाले को बैंकिंग तंत्र में हर स्तर पर ‘‘लापरवाही बरते’’ जाने का मामला बताया।