बड़े पर्दे पर रियल पैड मैन की कहानी देखकर उत्साहित है उनसे प्रेरित महिलाओं का समूह

(रूपेश सामंत) 

पणजी...रील लाइफ पैडमैन अक्षय कुमार की फिल्म जहां बॉक्स आफिस पर धूम मचा रही है लेकिन उनकी इस फिल्म को लेकर गोवा के एक गांव में कुछ अलग ही तरह का उत्साह है। तमिलनाडु के मुरूगनाथन से प्रभावित गोवा की ये महिलाएं अपनी प्ररेणा स्रोत के जीवन पर बनी फिल्म ‘पैड मैन’ देखने के लिए दूसरे ही दिन थियेटर पहुंचीं। इन महिलाओं के लिए इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देखना बड़ा ही रोमांचक अनुभव रहा।

राजधानी से कुछ 45 किलोमीटर दूर बिचोलिम तालुका के मुलगांव गांव की इन महिलाओं ने तीन साल पहले देवदार की लकड़ी से बने कागज से सेनेटरी नैपकिन बनाने शुरू किये। पर्यावरण हितैषी तरीके से बने यह पैड बाजार के उपलब्ध अन्य सेनेटरी नैपकिन की तरह नहीं हैं, यह सड़ कर खाद बन जाते हैं और प्रदूषण नहीं फैलाते।

ब्रांड नाम ‘सखी’ से सेनेटरी नैपकिन बनाने वाले इस स्वयं सहायता समूह की प्रमुख जयश्री पवार ने बताया, ‘‘फिल्म रिलीज होने के दूसरे दिन पूरे समूह ने बिचोलिम के सिनेमाघर में इसे देखा। मुरूगनाथन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनके जीवन को बड़े पर्दे पर देखना बहुत मजेदार था।’’ 

‘सखी’ ब्रांड तीरथन इंटरप्राइज के नाम पर पंजीकृत है और इसका मुख्यालय बिचोलिम में है। फिल्म देखकर उत्साहित पवार का कहना है, ‘‘हमें मालूम था कि फिल्म बन रही है। मुरूगनाथन ने खुद हमें फोन पर यह सूचना दी थी।हम सब इसकी रिलीज का इंतजार कर रहे थे।’’ 

कुछ साल पहले किसी मित्र ने पवार और मुरूगनाथन को मिलवाया था। उनसे प्रेरित होकर पवार ने 10 महिलाओं का एक समूह बनाया और सेनेटरी नैपकिन बनाने का काम शुरू किया। हालांकि इनकी शुरुआती यात्रा बहुत मुश्किल थी। लोग इनके बनाये नैपकिन खरीदने को तैयार नहीं थे, दुकानदार उसे अपने पास रखना नहीं चाहते थे।

फिर कुछ लोगों ने इनकी मदद की और ‘सखी’ के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाया, और सखी की यात्रा शुरू हो गयी। पवार का कहना है, हालांकि स्थानीय खरीददार अब भी उन्हें ज्यादा तरजीह नहीं देते हैं, लेकिन ऑनलाइन ग्राहकों की संख्या काफी अच्छी है।